नैनीताल। दुनिया भर में बढ़ते वायु प्रदूषण पर अब नहीं जागे तो बहुत देर हो जाएगी। यह वक्त प्रदूषण के खिलाफ मिलकर लड़ाई लड़ने का है, इसलिए दुनिया भर के वैज्ञानिक प्रदूषण से निपटने के लिए एक दूसरे से अपने शोध और अनुभव शेयर करें। यह बातें ‘बढ़ते वायु प्रदूषण और उससे मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों’ को लेकर एरीज में हुई कार्यशाला के दौरान वैज्ञानिकों ने कहीं।
आर्य भट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एरीज) की ओर से एशिया के वैज्ञानिकों की कार्यशाला का शुक्रवार को शुभारंभ नैनीताल-भवाली रोड में जोखिया क्षेत्र में स्थित एक रिजॉर्ट में एरीज के निदेशक डॉ. वहाबउद्दीन ने किया। इस दौरान उन्होंने एशियाई देशों में बढ़ते वायु प्रदूषण पर चिंता जताते हुए इसे मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक बताया। उन्होंने वैज्ञानिकों और शोध छात्रों का आह्वान किया कि वह अपने शोध कार्यों के साथ-साथ आम लोगों को भी इसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करें। भौतिकी रिसर्च अनुसंधान प्रयोगशाला अहमदाबाद से पहुंचे वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. श्याम लाल ने प्रदूषित वायुमंडल में मौजूद विभिन्न गैसों का मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्परिणामों की जानकारी दी। जापान से पहुंचे डा. हीरो सीता निमोतो ने बच्चों में बढ़ते प्रदूषण के प्रभाव की जानकारी देते हुए कहा कि मौजूदा समय में पीएम (पार्टीकल मैटर) 215 का प्रभाव बच्चों पर अधिक पड़ रहा है। सिंगापुर के वैज्ञानिक डॉ. डेविट कोहे ने प्रदूषित गैसों से मनुष्य को होने वाले शारीरिक नुकसान के बारे में बताया। इस मौके पर प्रो. सरीन एरो
सेेल, डॉ. लीया, डॉ. अब्दुल सलाम, डॉ. कैंडिस, एरीज के वैज्ञानिक डॉ. नरेंद्र सिंह, डॉ. समरेश भट्टाचार्य, डॉ. वीसी दुम्का समेत कई वैज्ञानिक मौजूद थे।
नैनीताल में 400 पीपीएम पार Co2
नैनीताल। सरोवर नगरी में कार्बन डाई ऑक्साइड का स्तर साल दर साल बढ़ता ही जा रहा है। 13 साल पहले जहां 380 पीपीएम (पार्ट्स पर मिलियन) था वह इस वर्ष बढ़कर 400 से 410 पीपीएम पहुंच गया है। यह जानकारी एरीज के वायुमंडलीय वैज्ञानिक और कार्यशाला के समन्वयक डॉ. मनीष नाजा ने दी।
डॉ. नाजा ने बताया कि वर्ष 2006 में एरीज में वायुमंडल में प्रदूषित गैसों का स्तर पता लगाने के लिए उपकरण लगाए गए थे, जिनसे पीपीएम की स्थिति पता चलती है। उन्होंने कार्बन डाई ऑक्साइड के बढ़ते स्तर के लिए ग्रीन हाउस गैसों के तेजी से हो रहे उत्सर्जन को जिम्मेदार ठहराया। डॉ. नाजा ने कहा कि नैनीताल और इसके आसपास का क्षेत्र वायुमंडल को प्रदूषित नहीं कर रहा है बल्कि यह प्रदूषण 50 से 100 किलोमीटर के दायरे से उठने वाली गैसों के कारण है। एक सवाल के जवाब में डॉ. नाजा ने कहा कि बृहस्पतिवार को हुई ओलावृष्टि और मूसलाधार बारिश क्लाइमेट चेंज की वजह से नहीं हुई बल्कि वह पश्चिमी विक्षोप में एकाएक हुई हलचल का असर था।
इस तरह की कार्यशालाएं आयोजित होना अच्छी पहल है। इससे एशियाई देशों के वैज्ञानिक वायु प्रदूषण पर रोक लगाने के लिए अपने अनुभवों को एक दूसरे के साथ साझा कर सकेंगे, बाद में इसका लाभ पूरी दुनिया को मिलेगा।
-डॉ. साईकुन कैंडिस, वैज्ञानिक ताइवान।
कार्यशाला में अब तक जो कुछ सीखा है उसे हम अपने शोध छात्रों के साथ साझा करेंगे। सभी देशों के वैज्ञानिकों को अपने अनुभवों को आपस में बांटना होगा। लोकास्ट सैंसर शोधार्थियों के लिए बेहद मददगार साबित होंगे। इनका उपयोग कैसे करें इसके लिए शोध छात्रों को प्रेरित किया जाएगा।
-डा. हिरो सीतानिमोतो, वैज्ञानिक जापान
दुनिया भर में वायु प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है जो चिंता का विषय है। इसका समाधान निकालना बेहद जरूरी है। वायु प्रदूषण पर कैसे रोक लगाई जाए इसके लिए वैज्ञानिकों और नीति निर्धारकों को एक मंच पर आकर साथ साथ काम करना होगा।
-डॉ. श्याम लाल, वरिष्ठ वैज्ञानिक, भौतिकी रिसर्च अनुसंधान परिषद अहमदाबाद।