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गर्मी बढ़ते ही नहरों पर बढ़ी भीड़

Fri, 31 Mar 2017 02:08 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी। 
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गर्मी बढ़ते ही नहरों पर बढ़ी भीड़ - फोटो : अमर उजाला
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हल्द्वानी। गर्मी ने अभी से हलकान करना शुरू कर दिया है। सूरज की तपिश लोगों को बेहाल कर रही है। गर्मी ने छह वर्षों का रिकार्ड तोड़ दिया और 30 मार्च (बृहस्पतिवार) सबसे अधिक गर्म दिन रहा।
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अधिकतम तापमान 36.9 डिग्री सेल्सियस रहा जो सामान्य से पांच डिग्री अधिक था। हालांकि राज्य मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक विक्रम सिंह की मानें तो 1991 में 36.3 डिग्री सेल्सियस पारा था और उसके बाद 30 मार्च 17 को सबसे अधिक तापमान रहा। 
  बृहस्पतिवार को सुबह से तपिश का एहसास हो रहा था। सुबह लगभग नौ बजे ही गर्मी ने सभी को बेहाल कर दिया। दोपहर 12 बजे के बाद लू चलने लगी और गर्मी अधिक बढ़ गई। लू चलने और गर्मी बढ़ने से सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा।
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हालत ऐसी हो गई कि दिन में गर्मी के कारण दिन में पंखे भी गर्म हवा फेंक रहे थे। राज्य मौसम विज्ञान केंद्र की मानें तो अधिकतम तापमान 36.9 और न्यूनतम तापमान 15 डिग्री सेल्सियस रहा।

न्यूनतम तापमान भी सामान्य से दो डिग्री अधिक था। केंद्र के निदेशक विक्रम सिंह ने बताया कि हवा की दिशा बदली है। उत्तर-पश्चिमी दिशा से हवा चलने के कारण गर्मी बढ़ी है। कहा कि एक से छह अप्रैल तक राहत मिलेगी।

हवा की दिशा बदलकर दक्षिणी-पूर्वी होगी। हवा की दिशा बदलने के कारण नमी बढ़ेगी और राज्य के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होगी। पांच और छह अप्रैल को अच्छी बारिश होने की संभावना है। बारिश होने के कारण अधिकतम तापमान में सात से आठ डिग्री सेल्सियस कम होगा। कहीं-कहीं पारा सामान्य से एक-दो डिग्री कम रह सकता है। 
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वर्ष        अधिकतम तापमान 
30.3.11    33.6
30.3.12    34.2
30.313    31.7
30.3.14   32.6
30.3.15   33.8
30.3.16  34.5 
30.3.17  36.9


हल्द्वानी। पेयजल किल्लत के साथ ही गौला का गिरता जलस्तर चिंता का सबब बनता जा रहा है। इस बार अभी से गौला का जलस्तर एक सौ क्यूसेक से नीचे आना गर्मियों में गंभीर पेयजल संकट की ओर इशारा कर रहा है। जलसंस्थान ने हालात पर काबू पाने के लिए कारगर कदम नहीं उठाए तो हालात बेकाबू हो सकते हैं।

पेयजल किल्लत की प्रमुख वजह नलकूपों से गिरते जलस्तर के कारण लाइनों में प्रेशर का नहीं होना और लाइनों के छोटा पड़ने से पानी नहीं पहुंच पाना माना जा रहा है। बृहस्पतिवार को गौला का जलस्तर 84 क्यूसेक पर पहुंच गया। जबकि 2016 में आज ही के दिन गौला का जलस्तर 104 क्यूसेक था और 2015 में 282 क्यूसेक रिकार्ड किया गया।

2015 में अधिक जलस्तर की वजह इसी दिन 5 मिमी बारिश रिकार्ड की गई थी। गौला के जलस्तर की पिछले साल के जलस्तर से तुलना करें तो आज के  दिन गौला में 20 क्यूसेक अधिक पानी था। इस बार गिरता जलस्तर गंभीर पेयजल संकट की ओर इशारा कर रहा है। पेयजल स्तर के गिरने से इस वर्ष अभी से पेयजल संकट गहराने लगा है।

गौला से फिलहाल लगातार 30 एमएलडी पानी जलसंस्थान के शीशमहल स्थित ट्रीटमेंट प्लांट को मिल रहा है, मगर नलकूपों का जलस्तर गिरने से लाइनों में प्रेशर कम हो गया है। लाइनें छोटी भी हैं जिस कारण कई इलाकों में पानी नहीं पहुंच पा रहा है। 
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