चुनावी विगुल बज गया है। भाजपा और कांग्रेस ही नहीं बल्कि संभावित प्रत्याशियों में टिकट की मारामारी के लिए महाभारत छिड़ी है। चुनावी संग्राम की तैयारियों में एक धुरंधर नेता उतनी ही शिद्दत से रामायण की रिहर्सल में डूबे हैं।
कालाढूंगी से भाजपा विधायक बंशीधर भगत क्षेत्र में जनसंपर्क के बाद शाम को रिहर्सल करने रंगमंच में पहुंच रहे हैं। दरअसल, भगत चार दशकों से रामलीला में अभिनय करते हैं। रामलीला की तैयारियों के साथ उनका दशरथ के किरदार के लिए रिहर्सल भी शुरू हो गया है।
ऊंचापुल की रामलीला स्वर्ण जयंती के पायदान पर है। रामलीला के मंच में किरदार निभाने वाले सबसे पुराने कलाकार विधायक बंशीधर भगत हैं। भगत 40 सालों से रामलीला से जुड़े हैं।
32 सालों तक भगत ने हर साल रामलीला मंच में अंगद, परशुराम और दशरथ का किरदार निभाया है। विगत आठ सालों से दशरथ का किरदार निभाते हैं।
तत्कालीन उत्तरप्रदेश सरकार में राज्य मंत्री और उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री रहने के बाद भी बंशीधर भगत ने रंगमंच से खुद को कभी अलग नहीं किया। 67 साल की उम्र में भी भगत रामलीला के मंचन से जुड़े हैं और दशरथ का किरदार निभा रहे हैं।
प्रमुख राजनैतिक दल विधानसभा चुनाव की माथापच्ची में लगे हैं तो नेताओं में टिकट पाने के लिए महाभारत है। विधायक बंशीधर भगत कालाढूंगी से इस बार भी भाजपा के प्रबल दावेदार हैं।
समर्थकों के साथ जनसंपर्क के बाद शाम को रामलीला के कलाकारों के साथ रिहर्सल में शामिल हो रहे हैं। भगत के मुताबिक ऊंचापुल में दो अक्तूबर से रामलीला शुरू हो जाएगी। रामलीला के पर्दे में दशरथ के किरदार में पांच अक्तूबर को उनका अभिनय होगा। पूरी रामलीला में तीन दिन उनका किरदार होगा।
रंगमंच के प्रति युवा पीढ़ी का रुझान खत्म हो रहा है। रामलीला में अब गिनती के दर्शक होते हैं। नए कलाकार भी इससे नहीं जुड़ रहे हैं। ऐसे में कुछ दशकों बाद रामलीला का जिक्र सिर्फ किस्से कहानियों में सुनाने को मिलेगा। अपनी धार्मिक विरासत को बचाए रखने के लिए नए कलाकारों को आगे आना चाहिए।
- बंशीधर भगत, विधायक
भगत का राजनैतिक सफर
विधायक बंशीधर भगत का राजनैतिक अनुभव और सफर सबसे लंबा है। तत्कालीन उत्तरप्रदेश में कल्याण सिंह सरकार में 1993 में राज्य मंत्री और 2007 में उत्तराखंड में वन एवं पर्यावरण मंत्री रहे हैं। कुमाऊं से सर्वाधिक पांच बार विधायक बनने का रिकार्ड भी उन्हीं के नाम दर्ज है।