फैकल्टी और सीनियर रेजीडेंट की कमी को लेकर राजकीय मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस की मान्यता में पेच फंसा है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन को एक माह के भीतर सभी कमियां दूर करनी है। मान्यता को लेकर अगले माह एमसीआई का दौरा हो सकता है।
वर्ष 2009 में राजकीय मेडिकल कॉलेज को एमबीबीएस की मान्यता मिली थी। पांच वर्ष बाद मान्यता का नवीनीकरण होता है। पूर्व प्राचार्य डॉ. आरसी पुरोहित के समय एमसीआई (मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया) की टीम आई थी, लेकिन मान्यता पर मुहर नहीं लगी थी।
पूर्व प्राचार्य डॉ. सीएमएस रावत के समय कागजों में बाजीगरी की गई, मगर घर के भेदी ने ही पलीता लगा दिया। एमसीआई ने सीनियर रेजीडेंट में 12 प्रतिशत और फैकल्टी में 12 प्रतिशत की कमी बताते हुए मान्यता में पेच लगा दिया था।
दो दिन पूर्व मंडलायुक्त के छापे के दौरान भी मान्यता का मामला उठा था। मंडलायुक्त ने भी एक माह में फैकल्टी और सीनियर रेजीडेंट की कमी पूरी करने के निर्देश दिए थे। मेडिकल कॉलेज प्रशासन को एक माह के भीतर सभी कमियों को पूरा करना है। नवंबर में एमसीआई मान्यता को लेकर दौरा कर सकती है।