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Uttarakhand Lockdown: पड़ोसियों ने पेश की मानवता की मिसाल, बेटे लॉकडाउन में फंसे तो खुद किया वृद्धा का अंतिम संस्कार

Sun, 12 Apr 2020 10:32 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रामनगर (नैनीताल)
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रामनगर श्मशान घाट पर वृद्धा का अंतिम संस्कार करते पड़ोसी - फोटो : अमर उजाला
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कोरोना संक्रमण क्या-क्या नहीं दिखा रहा। उत्तराखंड के रामनगर में लॉकडाउन के चलते न तो एक मां को बेटों के हाथों अग्नि नसीब हुई और ना ही बेटे मां के अंतिम दर्शन कर पाए। इस वृद्ध मां का एक बेटा फरीदाबाद में नौकरी करता है और दूसरा बेटा इन दिनों दिल्ली में है। ऐसे में पड़ोसी ने अपना धर्म निभाते हुए वृद्धा की चिता को मुखाग्नि देकर उसका अंतिम संस्कार किया।

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मधुवन कॉलोनी फेस एक पीरूमदारा निवासी 93 वर्षीय दुर्गा देवी का शनिवार सुबह बीमारी के चलते निधन हो गया। उनके दो बेटे हैं। एक बेटा नरेंद्र सिंह फरीदाबाद में सिंचाई विभाग में क्लर्क हैं तो दूसरा पृथ्वी सिंह रिटायर सैनिक हैं। वह दिव्यांग हैं। दुर्गा देवी पृथ्वी सिंह के साथ ही रहतीं थीं लेकिन लॉकडाउन से पहले वह बेटी के पास दिल्ली चले गए थे। यहां घर में दुर्गा देवी पोते पूरन सिंह के परिवार के साथ पीरूमदारा में रहती थीं। पूरन सिंह आसाम राइफल्स में हैं। वह भी ड्यूटी पर हैं।

शनिवार की सुबह दुर्गा देवी के निधन की जानकारी मिलने पर कॉलोनी समिति के अध्यक्ष दिनेश बिष्ट मौके पर पहुंचे। उन्होंने वृद्धा के दोनों बेटों से फोन पर बात की, जिन्होंने लॉकडाउन के चलते मां के अंतिम संस्कार में आने में असमर्थता जताई। घर पर दोनों बेटों और पोते के न होने पर पड़ोसियों ने पीरूमदारा पुलिस चौकी को सूचना दी।
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पुलिस की अनुमति मिलने पर कॉलोनी निवासी नंदन सिंह, बलवंत सिंह, गोविंद सिंह रावत, धन सिंह, दलीप सिंह और हीरा सिंह आदि ने दुर्गा देवी का अंतिम संस्कार किया। वृद्धा को मुखाग्नि उनके पड़ोसी नंदन सिंह ने दी।

 

 

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मां को मुखाग्नि नहीं देने का रहेगा मलाल : पृथ्वी सिंह

पृथ्वी सिंह ने कहा कि उन्हें जिंदगी भर यह मलाल रहेगा कि वह मां को मुखाग्नि नहीं दे पाए। बेटे का कर्तव्य होता है कि वह माता-पिता का अंतिम संस्कार करें, लेकिन परिस्थिति ऐसी बन गई कि वह चाह कर भी कुछ नहीं कर पा रहे हैं।

पृथ्वी सिंह के अनुसार वे 100 प्रतिशत दिव्यांग हैं और नौ मार्च को उनकी तबीयत खराब हो गई थी। इसके बाद वह 11 मार्च को बेटी धरमा के पास (नरेला) दिल्ली में इलाज कराने गए थे। डिस्चार्ज होकर जब वह 21 मार्च को घर लौटना चाह रहे थे, तभी लॉकडाउन हो गया। तब से वह दिल्ली में फंसे हैं, कोई उनकी सुनने को तैयार नहीं है। मां की मौत की खबर सुनकर जब मैंने दिल्ली पुलिस से घर जाने की अनुमति मांगी तो उन्होंने इंकार कर दिया। ऐसे में क्या करें।

रिश्तेदारों का जीवनभर ऋणी रहूंगा 
पृथ्वी सिंह ने बताया कि उनका छोटा भाई नरेंद्र फरीदाबाद में फंसा है। मां के निधन के समय घर में पुत्रवधू दीपा, नौ वर्षीय पोती योगिता और छह वर्षीय पोता वंश ही घर में मौजूद थे। मां के निधन होने पर पुत्रवधू ने सूचना दी थी, तब जाकर मैंने आसपास के लोगों को फोन से मदद के लिए कहा। पीरूमदारा के पार्वती कुंज निवासी एक रिश्तेदार को फोन कर सभी व्यवस्था करने के लिए कहा। सभी ने सहयोग किया, जिनका में ऋणी जीवनभर रहूंगा।

वीडियो कॉलिंग कर रहे हैं क्रियाकर्म
पृथ्वी सिंह के अनुसार, मां का अंतिम संस्कार मोहल्ले वालों और रिश्तेदारों के सहयोग से कर दिया गया, लेकिन क्रियाकर्म अब उनका छोटा भाई नरेंद्र वीडियो कॉलिंग के माध्यम से फरीदाबाद में कर रहा है। पीरूमदारा से पंडित जी क्रियाकलापों के बारे में जानकारी दे रहे हैं। दिव्यांग होने की वजह से मुझे काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा
है। इस कारण क्रियाकर्म छोटा भाई नरेंद्र कर रहा है।
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