पृथ्वी सिंह ने कहा कि उन्हें जिंदगी भर यह मलाल रहेगा कि वह मां को मुखाग्नि नहीं दे पाए। बेटे का कर्तव्य होता है कि वह माता-पिता का अंतिम संस्कार करें, लेकिन परिस्थिति ऐसी बन गई कि वह चाह कर भी कुछ नहीं कर पा रहे हैं।
पृथ्वी सिंह के अनुसार वे 100 प्रतिशत दिव्यांग हैं और नौ मार्च को उनकी तबीयत खराब हो गई थी। इसके बाद वह 11 मार्च को बेटी धरमा के पास (नरेला) दिल्ली में इलाज कराने गए थे। डिस्चार्ज होकर जब वह 21 मार्च को घर लौटना चाह रहे थे, तभी लॉकडाउन हो गया। तब से वह दिल्ली में फंसे हैं, कोई उनकी सुनने को तैयार नहीं है। मां की मौत की खबर सुनकर जब मैंने दिल्ली पुलिस से घर जाने की अनुमति मांगी तो उन्होंने इंकार कर दिया। ऐसे में क्या करें।
रिश्तेदारों का जीवनभर ऋणी रहूंगा
पृथ्वी सिंह ने बताया कि उनका छोटा भाई नरेंद्र फरीदाबाद में फंसा है। मां के निधन के समय घर में पुत्रवधू दीपा, नौ वर्षीय पोती योगिता और छह वर्षीय पोता वंश ही घर में मौजूद थे। मां के निधन होने पर पुत्रवधू ने सूचना दी थी, तब जाकर मैंने आसपास के लोगों को फोन से मदद के लिए कहा। पीरूमदारा के पार्वती कुंज निवासी एक रिश्तेदार को फोन कर सभी व्यवस्था करने के लिए कहा। सभी ने सहयोग किया, जिनका में ऋणी जीवनभर रहूंगा।
वीडियो कॉलिंग कर रहे हैं क्रियाकर्म
पृथ्वी सिंह के अनुसार, मां का अंतिम संस्कार मोहल्ले वालों और रिश्तेदारों के सहयोग से कर दिया गया, लेकिन क्रियाकर्म अब उनका छोटा भाई नरेंद्र वीडियो कॉलिंग के माध्यम से फरीदाबाद में कर रहा है। पीरूमदारा से पंडित जी क्रियाकलापों के बारे में जानकारी दे रहे हैं। दिव्यांग होने की वजह से मुझे काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा
है। इस कारण क्रियाकर्म छोटा भाई नरेंद्र कर रहा है।