फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कॉर्बेट पार्क के अंदर अवैध रूप से पहुंचा दी बिजली की लाइन

विज्ञापन
विज्ञापन
हल्द्वानी। कॉर्बेट पार्क में अवैध निर्माण के बाद बिना अनुमति के बिजली लाइन डालने का भी मामला सामने आया है। यह बिजली लाइन बिना वन भूमि हस्तांतरण के कोटद्वार से पाखरो (कार्बेट पार्क के कालागढ़ पाखरो) तक अंडर ग्राउंड पहुंचाई गई।
विज्ञापन

कॉर्बेट पार्क के कालागढ़ वन प्रभाग में अवैध रूप से निर्माण समेत तमाम अनियमितताओं का मामला सामने आया था। यह प्रकरण सुप्रीम कोर्ट की सेंट्रल एंपावर्ड कमेटी के पास भी पहुंच चुका है। अब एक और मामला सामने आया है। सूत्रों के अनुसार पाखरो में जहां पर बाड़ा बड़ा बनाया जा रहा था, उसके गेट को चलाने के लिए बिजली की जरूरत थी। ऐसे में कोटद्वार से बिजली की लाइन को पाखरो तक पहुंचाया गया। 20 किमी से अधिक बिजली लाइन को अंडरग्राउंड पहुंचाया गया है। इस बिजली लाइन को कोटद्वार-सनेह-गुर्जर स्रोत होते हुए पाखरों तक पहुंचाया गया।
सूत्रों के अनुसार इस काम पर करीब तीन करोड़ की लागत आने का अनुमान लगाया गया था। इसके लिए कॉर्बेट फाउंडेशन के माध्यम से 90 लाख रुपये जारी भी कर दिए गए थे। इस कार्य के लिए टीएसी अनुमति की प्रक्रिया भी शुरू की गई थी जो पूरी नहीं हुई थी। इसके अलावा बिना वन भूमि हस्तांतरण प्रक्रिया को पूरा किए यह बिजली की लाइन डालने की बात सामने आ रही है। एक और घपला सामने आने पर वन विभाग में खलबली मची हुई है। सूत्रों के मुताबिक पूरे प्रकरण को वन मुख्यालय के पास भी भेजा जा चुका है।
विज्ञापन

नहीं ली गई अनुमति : पीसीसीएफ
हल्द्वानी। प्रमुख वन संरक्षक विनोद कुमार सिंघल का कहना है कि वन भूमि हस्तांतरण की जरूरत नहीं होती है पर बिजली की लाइन बिछाने के लिए अनुमति की जरूरत होती है यह अनुमति नहीं ली गई है। यह जांच का विषय है।
कालागढ़ वन प्रभाग में कई गड़बड़ियां हुईं थीं
हल्द्वानी। कार्बेट पार्क के कालागढ़ वन प्रभाग में कई गड़बड़ियों की बात सामने आने के बाद अपर प्रमुख वन संरक्षक वन भूमि हस्तांतरण की अध्यक्षता में एक जांच समिति का गठन किया गया था। इस जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। सूत्रों के अनुसार इसमें पेड़ों के अवैध पातन, बिना अनुमति भवनों का निर्माण, बाड़ा निर्माण में प्रक्रियात्मक गड़बड़ी की बात सामने आई थी। भवन निर्माण के लिए हुई खरीद में वित्तीय नियमों और मानकों का ध्यान नहीं रखा गया था। संबंधित मामले में तत्कालीन डीएफओ और मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को निलंबित कर दिया गया था। इसके साथ ही कार्बेट पार्क निदेशक को वन मुख्यालय से अटैच भी किया गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें