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आईआईटी रूडकी के निष्कासित छात्रों की याचिकाएं खारिज

Thu, 23 Jul 2015 01:19 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो/नैनीताल।
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हाईकोर्ट ने आईआईटी रूडकी के निष्कासित छात्रों की याचिकाओं को खारिज कर  दिया है। साथ ही न्यायालय ने  पांच सीजीपीए से अधिक नंबर वाले केवल दो छात्रों की याचिका में आईआईटी रूडकी को  आदेशित किया है कि वह उनके प्रार्थना पत्र पर एक सप्ताह के भीतर निर्णय  लें।
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न्यायमूर्ति आलोक सिंह की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। आईआईटी रूडकी से निष्कासित छात्र सत्यप्रकाश व अन्य ने हाईकोर्ट में अलग अलग याचिका दायर कर कहा था कि आईआईटी रूडकी की ओर से 15 जून 2015 को कालेज से निकाल दिया गया था।

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि आईआईटी रूडकी के रेग्यूलेशन 33 के अनुसार केवल उन्हीं विद्यार्थियों को बाहर किया जा सकता है जो प्रथम वर्ष के अन्त में निर्धारित अर्न कैडिट एव सीजीपीए लाने में असफल रहते है। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उनका अर्न कैडिट निर्धारित 22 अंक से ज्यादा है।
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इसलिए उनका रजिस्ट्रेशन निरस्त नहीं किया जा सकता है। आईआईटी रूडकी के अधिवक्ता विपुल शर्मा ने कोर्ट में तर्क रखा कि रेग्यूलेशन के अनुसार वह केवल उन्हीं विद्यार्थियों को प्रवेश देंगे जो अर्न कैडिट एवं सीजीपीए लाता है।
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 कोर्ट में सुनवाई के दौरान दो छात्र अनुराग मेमरोट व मौहम्मद सैफ अनवर के अधिकवक्ता की ओर से बताया गया कि उनका सीजीपीए निर्धारित मानदंड के अनुरूप है।

पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने दोनों विद्यार्थियों के मामले में आईआईटी रूडकी को एक सप्ताह के भीतर निर्णय लेने को कहा है।

इसके अलावा शेष 64 विद्यार्थियों की याचिकाओं को खारिज करते हुए आईआईटी से निकाले जाने के फैसले को सही ठहराया।
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