वस्तु एवं सेवा कर में पहली बार कृषि आय को भी कर के दायरे में लाया गया है हालांकि यह दायरा कृषि भूमि को बटाई पर देकर आय हासिल करने वाले किसान के लिए हैै। किसानों को इस आय के लिए 18 फीसदी कर चुकाना होगा। जिससे पहाड़ व मैदान में जो भी थोड़ी बहुत खेती है, प्रभावित होने की आशंका है।
उत्तराखंड विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाला प्रदेश है। यहां पहाड़ में खेती बाड़ी करना बेहद जटिल है। जंगली जानवरों का आतंक, सिंचाई के लिए गूल नहरें नहीं, पानी की कमी, फसल को मंडी तक पहुंचाने में कठिनाई, फसल का सही दाम नहीं मिलना, मौसमी मार वगैरह कई वजहें जिसकी वजह से पहाड़ के जिलों में खेती लगभग न के बराबर है।
कृषि को बढ़ावा देने में सरकारी इच्छाशक्ति नहीं होने से कमोबेश यही हालत मैदानी जिलों की भी है। यही वजह है कि प्रदेश में अधिकांश छोटी बड़ी जोतों के स्वामी भूमि को बटाई पर देकर नौकरी कर जीविका चलाते हैं। इधर जीएसटी में बटाई को लीज, रेंटिंग की श्रेणी में मानकर कर का प्रावधान किया गया है।
किसानों को बटाई से होने वाली आय पर 18 फीसदी की दर से कर देना होगा। साथ ही किसान को जीएसटी में पंजीयन भी कराना अनिवार्य होगा। इस चुकाए कर पर इनपुट टैक्स क्रेडिट की सुविधा भी नहीं है। पहले से ही जहां प्रदेश में किसान खेती बाड़ी छोड़ रहे हैं, ऐसे में जीएसटी लागू होने के बाद पूरी तरह खेती बाड़ी से मुंह मोड़ लेंगे।
इस बारे में वाणिज्यिक कर अधिकारी भी संशय में है। उनका भी मानना है कि उच्च स्तरीय अधिकारियों में दो मत हैं एक बटाई को कारोबार की तरह मानकर कर के पक्ष में है, दूसरा कृषि आय मान रहा है इसलिए अधिकारी इस बारे में कुछ भी कहने से कतरा रहे हैं।
खुद खेती करने वालों को नहीं देना होगा कर
जीएसटी में ऐसे किसानों को कर मुक्त रखा गया है जो कृषि भूमि पर खुद खेती करते हैं। उनका परिवार भी अगर खेती करता है तो उसको भी कर नहीं देना होगा। सिर्फ बटाई पर ही कर लगाया गया है।
10 लाख से अधिक आय पर ही देना होगा कर
बेशक जीएसटी में बटाई की आय को कर के दायरे में लाया गया है लेकिन यहां व्यवसाय की तरह ही 10 लाख की सीमा निर्धारित की गई है। अगर काश्तकार को बटाई से सालाना आय 10 लाख या अधिक होती है तो ही कर चुकाना होगा।
ये हैं नुकसान
इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं मिलने पर कर का बोझ बटाईदार पर ही होगा जिससे बटाई दार भी कृषि से कतराएंगे
बटाई पर कर होने से काश्तकारों को खेती से मोह भंग होगा
कृषि आय कर के दायरे में आने पर खेती को नहीं मिलेगा बढ़ावा