हल्द्वानी। अगर हालात नहीं सुधरे तो आने वाले दिनों में हल्द्वानी की आबोहवा में जीना मुश्किल हो जाएगा। उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) की ओर से दीवाली पर हवा और ध्वनि प्रदूषण के स्तर की जांच में यह बात सामने आई है।
सामान्य दिनों में शहर की हवा में पीएम (10) और पीएम (2.5) का स्तर तय मानक से अधिक दर्ज हुआ है, जो दिवाली के दिन 27 अक्तूबर को दोगुने से अधिक हो गया। ध्वनि प्रदूषण का हाल भी कुछ ऐसा ही है। डॉक्टरों की मानें तो बढ़ता प्रदूषण सेहत पर भारी पड़ रहा है। पीसीबी के अधिकारियों की मानें तो फिलहाल सामान्य दिनों में हवा और ध्वनि का स्तर सुरक्षित जोन में है, लेकिन यह स्थिति चेताने वाली है। पीसीबी की ओर से 21 और 27 अक्तूबर को शहर के तीन स्थानों पर ध्वनि प्रदूषण और 20 से तीन नवंबर तक वायु प्रदूषण के स्तर की जांच की गई थी।
वायु प्रदूषण
दिन पीएम-10 पीएम- 2.5
20 अक्तूबर 119 69
21 अक्तूबर 130 75
22 अक्तूबर 131 78
23 अक्तूबर 123 70
24 अक्तूबर 128 74
25 अक्तूबर 141 82
26 अक्तूबर 142 82
27 अक्तूबर 220 122
28 अक्तूबर 162 90
29 अक्तूबर 149 86
30 अक्तूबर 140 78
31 अक्तूबर 132 80
1 नवंबर 128 73
2 नवंबर 126 72
3 नवंबर 125 69
यह भी जानें
हवा में पीएम-2.5 का सुरक्षित स्तर 0-60 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर है, जबकि पीएम-10 को 100 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर होना चाहिए। पीएम-2.5 यानी प्रदूषण तत्वों के वो सबसे छोटे कण हैं जो 2.5 माइक्रोन व्यास से भी छोटे होते हैं। ये आसानी से फेफड़े और खून में मिल सकते हैं। जो स्वास्थ्य के लिहाज से खतरनाक हैं।
ध्वनि प्रदूषण का मानक स्तर (डेसीबल मेें)
क्षेत्र दिन रात्रि
(सुबह छह बजे से रात्रि नौ बजे तक) (रात्रि नौ बजे से सुबह छह बजे तक)
व्यावसायिक क्षेत्र 65 55
आवासीय क्षेत्र 55 45
शांत क्षेत्र 50 40
औद्योगिक क्षेत्र 75 70
सामान्य दिनों में प्रदूषण के स्तर की बात करें तो अभी शहर की आबोहवा सेफ जोन में है, लेकिन यह स्थिति चेताने वाली है। सामान्य दिनों की अपेक्षा दीवाली के दिन हवा में एलुमीनियम और आयरन की मात्रा ज्यादा दर्ज की गई है। प्रदूषण रहित वातावरण को पौधारोपण, सड़कों के रखरखाव, वाहनों के जाम की स्थिति से निपटना होगा। निजी वाहन के अपेक्षा पैदल अथवा सार्वजनिक यातायात के साधनों का उपयोग करने की पहल करनी होगी।
डॉ. आरके चतुर्वेदी, क्षेत्रीय अधिकारी, उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
वायु प्रदूषण बढ़ने से सांस, अस्थमा, एलर्जी संबधी रोगों में इजाफा हुआ है। पर्यावरण को बचाने के लिए जरूरी कदम उठाने होंगे।
डॉ. नीलांबर भट्ट, वरिष्ठ फिजीशियन
प्रदूषण बढ़ने से त्वचा, आंखों में एलर्जी, दमा जैसी बीमारियां बढ़ रही हैं। दवा के साथ मरीजों को मास्क पहनने की सलाह दे रहे हैं।
डॉ. पूजा सुयाल, वरिष्ठ ईएनटी रोग विशेषज्ञ