परिवहन विभाग ने लाइसेंस आवेदकों का टेस्ट सिम्युलेटर पर लेना शुरू कर दिया है। इस मशीन में बारिश में वाइपर चलाने से लेकर मोड पर इंडिकेटर देने तक के नंबर हैं। अगर सिम्युलेटर पर टेस्ट देते समय किसी यातायात नियम का पालन नहीं किया, तो परीक्षा में फेल हो सकते हैं और लाइसेंस नहीं मिलेगा। इसी के तहत परीक्षा में पांच में से दो परीक्षार्थी फेल तक हो गए।
परिवहन विभाग वाहन का अस्थाई और स्थाई लाइसेंस जारी करता है। इसमें अस्थाई लाइसेंस बनने के एक महीने बाद आवेदक स्थाई लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकता है। एआरटीओ प्रशासन संदीप वर्मा कहते हैं कि अब स्थाई लाइसेंस के लिए सिम्युलेटर (एक कंप्यूटराइज मशीन होती है, जिसमें सड़क पर वाहन चलाने जैसा आभास होता है) पर टेस्ट लेने और नंबर देने का काम शुरू किया गया है।
इसमें बारिश होने पर कार का वाइपर चलाना और बाद में बारिश बंद होने पर वाइपर बंद करना होता है। इंडीकेटर देना, रेड लाइट पर वाहन रोकने आदि के नियमों का पालन हुआ है देखने के साथ नंबर दिया जाता है। 100 नंबर का पेपर होता है, जिसका टेस्ट सिम्युलेटर पर होता है, न्यूनतम 60 अंक हासिल करना होता है।
अगर इससे कम नंबर आए, तो आवेदक फेल हो जाता है। पहले दिन पांच अभ्यर्थियों का इस पर टेस्ट लिया गया, जिसमें दो फेल हो गए।
पिछले साल से रखी हुई थी मशीन
लाखों रुपये की सिम्युलेटर मशीन 2016 में कार्यालय में आ गई थी। पर इसमें सॉफ्टवेयर की कमी के चलते टेस्ट शुरू ही नहीं हो सके थे। एक तरह से आधी-अधूरी तैयारी के साथ मशीनों को कार्यालयों को सौंपा गया था। लंबे समय से पत्राचार के बाद मशीन की खामी को दूर किया गया, तब जाकर टेस्ट शुरू हो सके।