भीमताल विधानसभा क्षेत्र के पांडेगांव ग्रामसभा के कई तोकों में पांच दिन से पेयजल आपूर्ति ठप है। लोग पानी को तरस रहे हैं। इसके बावजूद जनसमस्याएं हल कराने के दावे कर रहे प्रत्याशियों ने मतदाताओं की इस परेशानी को हल कराना तो दूर उसे जानने तक की जहमत नहीं उठाई।
न ही जल संस्थान की ओर से पेयजल आपूर्ति की कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई। इससे ग्रामीणों में गुस्सा है। लोगों का कहना है कि यदि जल्द व्यवस्था में सुधार न हुआ तो पोलिंग बूथों पर भी मतदान के दिन ड्यूटी में लगे कर्मचारियों और वोटरों को पानी की बोतलें लेकर ड्यूटी करने और वोट देने जाना पड़ेगा।
उल्लेखनीय है कि पांडेगांव ग्रामसभा और इससे लगे तोकों में पांडेगांव पंपिंग योजना के तहत घटिगाड़ स्थित गधेरे से पेयजल आपूर्ति की जाती है। चूंकि ग्रामसभा और तोक अत्यधिक ऊंचाई पर हैं लिहाजा उपभोक्ताओं तक पेयजल आपूर्ति के लिए गधेरे में 20 एचपी और 30 एचपी क्षमता के पंप लगाए गए हैं।
विभागीय कर्मचारियों के मुताबिक उक्त दोनों पंप बीते पांच दिन से खराब पड़े हैं। जिससे पांडेगांव ग्रामसभा के साथ-साथ बिलासपुर, कर्कोटक, भांकर और इसके आसपास के तोकों में रह रहे 300 से अधिक परिवार पानी को तरस गए हैं।
ग्रामीण बताते हैं कि कई बार वह विभागीय अधिकारियों से मौजूदा आबादी के लिहाज से नई पंपिंग योजना बनाने की मांग कर चुके हैं, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात ही रहा है। चूंकि दोनों पंप कई साल पुराने हैं, जिससे आए दिन फुंक जाते हैं।
ग्रामीण बताते हैं कि छह फरवरी को पहले 30 एचपी का पंप फुंका और उसके बाद 20 एचपी के पंप ने भी काम करना बंद कर दिया, जिसके चलते पेयजल आपूर्ति ठप हो गई। पांडेगांव क्षेत्र में पोलिंग बूथ भी बनाया जाता है।
यदि मतदान तक पेयजल आपूर्ति सुचारु नहीं हुई तो इस बार चुनाव ड्यूटी में लगे कर्मचारियों को पानी की बोतलें साथ लेकर ड्यूटी करने जाना होगा। पानी को परेशान ग्रामीणों के सब्र का बांध अब टूटने लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि शीघ्र व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो वह 15 फरवरी को मतदान वाले दिन इसका जवाब देंगे।
पंप खराब होने के कारण पांडेगांव पंपिंग योजना में आपूर्ति नहीं हो पा रही है। खराब पड़े पंपों को ठीक कराया जा रहा है। पंप ठीक होने के बाद ही पेयजल आपूर्ति सुचारू हो सकेगी।
- बीसी पाल, सहायक अभियंता जल संस्थान भीमताल।