हल्द्वानी। शहर के तीन बड़े अस्पताल एसटीएच, महिला और बेस अस्पताल डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे हैं। शासन ने तीनों अस्पतालों से कुल 32 डॉक्टरों के तबादले कर दिए। सबसे ज्यादा सुशीला तिवारी अस्पताल से 16 और महिला व बेस चिकित्सालय से 8-8 डॉक्टरों का ट्रांसफर हुआ। राहत के नाम पर महिला और बेस अस्पताल को अभी तक केवल एक-एक डॉक्टर ही मिला है, वह भी संशोधित तबादला सूची जारी होने के बाद। एसटीएच में गायनी और सर्जरी के पद पहले से खाली हैं। पहले से ही विशेषज्ञों की कमी से जूझ रहे अस्पतालों में तबादलों के बाद स्थिति और खराब हो गई है।
एसटीएच में चिकित्सकों के 15 पद रिक्त
डॉ. सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय में गायनी के सात और जनरल सर्जरी के आठ डॉक्टरों के पद खाली पड़े हैं। कुल 15 पद रिक्त होने से मरीजों को इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है। विशेषज्ञों की कमी के कारण अस्पताल को नेशनल मेडिकल काउंसिल की मान्यता मिलने में भी दिक्कत आ रही है। एनएमसी के मानकों के अनुसार मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पताल में पर्याप्त फैकल्टी होना जरूरी है। पद रिक्त होने से मान्यता पर संशय पैदा हो गया है। मौजूदा डॉक्टरों पर काम का बोझ बढ़ गया है। रोजाना ओपीडी और आपातकालीन सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
महिला अस्पताल आठ तबादलों के बदले मिले मिले दो डॉक्टर
महिला अस्पताल से आठ डॉक्टरों का तबादला हुआ है लेकिन यहां केवल दो चिकित्सक भेजे गए हैं। इनमें से भी एक ही चिकित्सक ने कार्यभार ग्रहण किया है। अस्पताल में वर्तमान में एनेस्थेटिस्ट और बाल रोग विशेषज्ञ के पद खाली हैं। दोनों स्त्री रोग विशेषज्ञ का भी ट्रांसफर हो चुका है। एक डॉक्टर बेस अस्पताल के आईसीयू में अटैच हैं। ऐसे में डिलीवरी और आपातकालीन केस निपटाने में दिक्कतें आ रही हैं। यह स्थिति तब है जबकि यहां रोजाना औसतन नौ-दस डिलीवरी और लगभग 300 की ओपीडी होती हैं। विशेषज्ञ न होने से गंभीर मरीजों को हल्द्वानी या बेस अस्पताल रेफर करना पड़ रहा है। अस्पताल की सीएमएस डॉ. उषा जंगपांगी ने बताया कि उनका ट्रांसफर रुद्रपुर के लिए हो गया है लेकिन सीनियर डॉक्टर के अवकाश पर होने के कारण वह किसी को चार्ज नहीं दे पाई हैं। सीनियर के लौटने पर वह रिलीव होंगी।
बेस में भी आपातकालीन सेवाएं प्रभावित
बेस अस्पताल से आठ चिकित्सक स्थानांतरित हुए हैं। यहां डॉक्टरों की कमी से आईसीयू और आपातकालीन सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। मरीजों को इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है और कई मामलों में रेफर करना पड़ रहा है। पीएमएस डॉ. केएस दताल का कहना है कि तबादले प्रशासनिक कारणों से किए गए हैं। रिक्त पदों को भरने के लिए शासन को पत्र लिखा गया है।
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54 रिक्त पद भरने से मेडिकल कॉलेज को भी मिलेंगे चिकित्सक
हल्द्वानी। प्रदेश में बोर्ड ने मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों के 54 रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इससे राजकीय मेडिकल कॉलेज में भी चिकित्सकों की तैनाती की उम्मीद है। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. जीएस तितियाल ने बताया कि शासन में 8 प्रोफेसर और 46 एसोसिएट प्रोफेसर पदों पर भर्ती प्रक्रिया अंतिम चरण में है। नए फैकल्टी के आने से मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई और मरीजों के इलाज दोनों में सुधार होगा। डॉक्टरों की कमी के कारण एनएमसी की मान्यता और मरीजों की सेवाओं पर भी असर नहीं पड़ेगा। बताया कि मेडिकल कॉलेज हर महीने वॉक इन इंटरव्यू के माध्यम से भी रिक्त पदों पर नियुक्ति करता है। संवाद