कारबाइन से लेकर एके-47 तक के उपकरण बनाने वाली एचएमटी रानीबाग पर बंदी का संकट मंडरा रहा है। आधुनिक मशीनों से लैस यह इकाई रक्षा उपकरण बनाने की क्षमता रखती है। रक्षा मंत्रालय से ही अब रक्षा की आस है। केंद्र सरकार की ओर से पहुंच रही चार सदस्यीय टीम को अब रानीबाग इकाई की तकदीर लिखनी है।
एचएमटी रानीबाग इकाई को डिफेंस का सबसे पहला आर्डर वर्ष 1999 में तारगन (नागपुर) से स्टील इंसर्ट बनाने का मिला। इंसर्ट का प्रयोग कारबाइन में होता है, इसके एक लाख पीस बनाए गए। वर्ष 2005-2006 में एचएएल कोरबा, आर्डिनेंस फैक्ट्री देहरादून, एचएएल अंबाझाली से तमाम उपकरण बनाने का आर्डर मिला।
इकाई ने डिफेंस का आर्डर पूरा करके दिया। कर्मचारी काफी लंबे समय से फैक्ट्री को डिफेंस में मर्ज करने की मांग उठा रहे थे। केंद्र सरकार ने कोलकाता आर्डिनेंस फैक्ट्री के डायरेक्टर जीसी एरेन, आर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड कोलकाता के डिप्टी डायरेक्टर वीके सिंह, देहरादून से ब्रिगेडियर एसडी चौधरी और रक्षा मंत्रालय के प्लानिंग आफिसर एसएस सोलबीया को संभावनाएं तलाशने को भेजा है। टीम देर रात हल्द्वानी पहुंच गई और मंगलवार सुबह फैक्ट्री का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट रक्षा मंत्रालय को देगी।
इन डिफेंस फर्मों से मिला आदेश
डिफेंस फर्म का नाम आइटम
आर्डिनेंस फैक्ट्री वर्नगांव = स्टील इंसर्ट 5.56, डाई होल्डर, इंजेक्टर पिंस, निडल कैप
एम्यूनेशन फैक्ट्री र्किकी = सेल्यूलायड कंटेनर, एम्यूनेशन कैरियर, इनर केस, स्लग फार केस, स्टील इंसर्ट आर्डिनेंस फैक्ट्री अंबाझारी = सेफ्टी लॉक, एमजीएल-40 एसेंबली
बच्चों को पढ़ाने के लिए जेवर तक रख दिए गिरवी
हालात ऐसे बदले की बच्चों को पढ़ाने के लिए बुढ़ापे में काम आने वाली एफडी (फिक्स डिपाजिट) और बचत खाते की रकम खर्च करने के साथ ही मोटा राशन खाने के दिन आ गए। 1990 से लेकर 1996 तक एचएमटी अपने परवान पर थी। एचएमटी की घड़ियां हाथों-हाथ बिकती थीं।
आधुनिकता की दौड़ में पिछड़ने और नई तकनीक का प्रयोग न करने के साथ ही नई कंपनियों की आमद ने एचएमटी को मार्केट से ही बाहर कर दिया। सभी इकाईयों में बेहतर प्रदर्शन करने वाली रानीबाग इकाई क्षेत्रवाद का भी शिकार हुई और धीरे-धीरे घाटे के गर्त में चली गई। एचएमटी कर्मियों को पिछले एक साल से वेतन नहीं मिला है साथ एडवांस वेतन के नाम पर आने वाले चार हजार रुपए भी समय पर नहीं मिल रहे हैं।
गृहणियों ने बताया कि समय का चक्र ऐसा घूमा है कि राशन की दुकान में मिलने वाला मोटा चावल और सड़ा हुआ गेहूं खाना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि चार तौले जेवर गिरवी बेचकर बच्चों की पढ़ाई पूरी करानी पड़ रही है। महिलाओं ने बताया कि अब तो बनिया भी उधार देने से हिचकने लगा है साथ ही रिश्तेदारों ने भी बिगड़ती आर्थिक स्थित देख मुंह मोड़ लिया है। कई लोग बेटी की शादी के लिए कराए गए फिक्स डिपाजिट और बैंक में जमा पूंजी निकालकर परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं।
सिंगापुर, जापान और स्विट्जरलैंड के लिए बना चुके हैं मेकेनिकल घड़ियां
हल्द्वानी। समय की प्रहरी के नाम से पहचान रखने वाली एचएमटी आज अपनी पहचान तलाश रही है। स्वर्णिम दौर से गुजरी एचएमटी की मेकेनिकल घड़ियों ने देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अपनी धाक जमाई। सिंगापुर, स्विट्जरलैंड और जापान तक से मेकेनिकल घड़ियों के आर्डर मिले। कंपनी ने समय रहते आर्डर पूरे भी किए।
मांगों को लेकर मोर्च का धरना जारी
हल्द्वानी। एचएमटी संयुक्त संघर्षशील मोर्चा ने नौ सूत्रीय मांगों को लेकर 82वें दिन भी धरना दिया। मोर्चा के अध्यक्ष एमएस बिष्ट ने कहा कि सांसद भगत सिंह कोश्यारी के प्रयासों ने डिफेंस फैक्ट्री की संभावनाएं तलाशने को एक टीम मंगलवार को फैक्ट्री का निरीक्षण करेगी। टीम के आने से फैक्ट्री कर्मियों में उम्मीद जगी है।
दूसरी ओर कर्मचारी नेता प्रकाश मिश्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री हरीश रावत ने को भी फैक्ट्री बचाने के लिए प्रयास करना चाहिए। यूपीए सरकार में केंद्रीय मंत्री रहने के दौरान उन्होंने कई बार आश्वासन दिया था। भारतीय मजदूर संघ के प्रदेश अध्यक्ष पूरन सिंह बिष्ट ने कहा कि उद्योग को बचाने का हर संभव प्रयास किया जाएगा। इस दौरान संयोजन नारायण राम आर्य, सचिव एमएन जोशी, शंकर दत्त तिवाड़ी, सुनील डोभाल, जितेंद्र सिंह, गिरीश चंद्र भट्ट, एलडी पलड़िया, खेम सिंह रावत आदि थे।
फैक्ट्री का इतिहास
= सितंबर 1982 में एचएमटी कारखाने की डीपीआर बनी।
= 12 दिसंबर 1982 उद्योग, इस्पात और खान मंत्री एनडी तिवारी ने किया शिलान्यास।
= 15 नवंबर 1985 को प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने फैक्ट्री का उद्घाटन किया।
= 92.302 एकड़ में फैली है फैक्ट्री।
= मशीनें की लागत 35 करोड़।
= जमीन और इमारत 3.5 करोड़।
= कारखाने का साजो-सामान 1.5 करोड़।
= आवासीय कालोनी 4 करोड़।
= जंगल के बीच टाइम ए से डी तक के कर्मचारियों के लिए 402 स्टाफ क्वार्टर।
= 719 प्रकार की देशी-विदेशी मशीनें स्थापित हुईं।
= वर्तमान में 523 कर्मचारी हैं और 447 कर्मचारी वीआरएस ले चुके हैं।
= 1984 में एचएमटी लिमिटेड के तहत नियुक्त कर्मचारियों को 2000 में एचएमटी वॉच लिमिटेड का कर्मचारी बना दिया।