एचएमटी बचाने को लेकर अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिले हैं। अब तक बिजली नहीं जुड़ने से जापान से मिले 10 हजार घड़ियों और रक्षा उपकरण बनाने का 40 लाख रुपये का आर्डर पूरा नहीं हो सका है।
एचएमटी रानीबाग फैक्ट्री की बिजली बकाया होने के कारण दिसंबर-2013 में काट दी गई थी। एचएमटी कर्मियों ने फैक्ट्री बचाने और बिजली कनेक्शन जुड़वाने के लिए कई बार मुख्यमंत्री हरीश रावत से गुहार लगाई थी। रावत उस वक्त यूपीए सरकार में केंद्रीय मंत्री थे। फरवरी 2014 में ताजपोशी होने के बाद भी एचएमटी कर्मी अपनी और फैक्ट्री की बदहाली को लेकर कई बार मुख्यमंत्री से मिले, मगर आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला। फरवरी-2015 से फैक्ट्री कर्मियों ने इकाई को बचाने के लिए आंदोलन शुरू किया था, जिसके बाद तमाम नेता रानीबाग पहुंचे। सभी ने कर्मियों के साथ फोटो खिंचवाई और आश्वासन देकर चले आए।
सांसद भगत सिंह कोश्यारी ने वित्त मंत्री से फोन पर बात कर दो माह के लिए एचएमटी रानीबाग का बिजली कनेक्शन जुड़वाने को कहा था। उन्होंने तर्क दिया था कि दो माह के लिए अगर कनेक्शन जुड़ गया तो जापान से मिले 10 हजार घड़ियों और 40 लाख रुपये के रक्षा उपकरण का काम पूरा हो जाएगा। इसके बावजूद अब तक फैक्ट्री की बिजली नहीं जुड़ी है। वहीं, रक्षा मंत्रालय की टीम का दौरा हो चुका है और रिपोर्ट आने के बाद कुछ सकारात्मक परिणाम दिखाई पड़ेंगे।