श्रीलंका में विश्व में सर्वाधिक पर्यटक भारत से जाते हैं, जो वहां जाने वाले कुल विदेशी पर्यटकों के बीस फीसदी से भी अधिक है। बीते वर्ष साढ़े तीन लाख से ज्यादा भारतीय पर्यटक वहां पहुंचे थे। भारतीयों के बाद वहां सर्वाधिक पर्यटक रूस, जर्मनी, इंग्लैंड और चीन से पहुंचते हैं। यह आश्चर्य की बात है कि इतनी भारी तादाद में भारतीय पर्यटक वहां पहुंचने और भारत के साथ गहरी साझा सांस्कृतिक विरासत, भारत से मिलने वाली भारी आर्थिक और तकनीकी सहायता और भारत का सबसे नजदीकी पड़ोसी होने के बावजूद वहां हिंदी भाषा और भारतीय रुपये का चलन बिल्कुल नहीं है।
विश्व के अनेक देशों में खासकर पर्यटन व्यवसायी अच्छी खासी हिंदी समझते हैं। दुबई जैसे विकसित देश में बेखटक लगभग हर व्यक्ति, विशेषकर व्यवसायी से, हिंदी में बात की जा सकती है। साथ ही भारतीय मुद्रा में लेन-देन भी आम है। श्रीलंका सरकार ने वहां की ड्यूटी फ्री दुकानों पर भारतीय रुपये को अधिकृत मुद्रा घोषित किया है।
श्रीलंका का अजीब प्रचलन है, वहां के ड्यूटी फ्री दुकानों पर खुद श्रीलंका की ही मुद्रा नहीं चलती, पर डॉलर चलता है। नेपाल और भूटान में भारतीय भाषा और मुद्रा आम चलन में है। कुवैत, सऊदी अरब, मॉरीशस, फिजी, इंडोनेशिया जैसे अनेक देशों में भी हिंदी में काम चलाया जा सकता है। इंग्लैंड, कनाडा, अमेरिका में भी भारी तादाद में लोग हिंदी बोल या समझ लेते हैं, लेकिन श्रीलंका में हिंदी भाषा बिल्कुल भी नहीं चलती। यही हाल भारतीय रुपये का भी है। गिने चुने छोटे व्यवसायी भारतीय रुपया ले भी लेते हैं, लेकिन आम चलन में वहां भारतीय रुपया कहीं भी स्वीकार्य नहीं है।
भारतीय पर्यटकों को वीजा फ्री एंट्री
श्रीलंका में भारतीय पर्यटक बगैर वीजा के घूमने जा सकते हैं। वे बगैर वीजा छह महीने तक रह सकते हैं। यह व्यवस्था पिछले वर्ष एक अक्तूबर से लागू की गई है। इसके लिए केवल इलेकट्रॉनिक यात्रा प्राधिकरण, ईटीए से ऑनलाइन ही यात्रा की स्वीकृति लेनी होती है।
मालदीव से तनाव के बाद भारत से इस पड़ोसी देश में ज्यादा जाने लगे हैं पर्यटक
बीते वर्ष भारत के मालदीव से संबंधों में आए तनाव के बाद से भारतीय पर्यटक मालदीव के बजाय श्रीलंका ज्यादा जाने लगे हैं। श्रीलंका के पर्यटक मंत्री हरिन फर्नांडो ने स्वयं इस तथ्य की जानकारी देते हुए कहा है कि इससे श्रीलंकाई पर्यटन को बहुत फायदा भी हो रही है।