नैनीताल हाईकोर्ट ने अल्मोड़ा के चितई के गोलू देवता मंदिर में जागेश्वर की तर्ज पर प्रबंधन समिति या ट्रस्ट बनाए जाने के मामले में दायर जनहित याचिका पर गुरुवार को सुनवाई की। जिसके बाद कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए तीन मार्च की तिथि नियत की। वहीं सुनवाई के दौरान अदालत ने डीएम से पूछा है कि वह ये बताएं कि इस संबंध में 2018 में जो जांच की गई है उस रिपोर्ट में क्या हुआ?
हाईकोर्ट ने तलब की सरकारी भूमि पर बने धार्मिक स्थलों की सूची
इससे पहले बुधवार को नैनीताल हाइकोर्ट ने सार्वजनिक स्थान और सरकारी भूमि पर अतिक्रमण कर मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा और चर्च बनाने के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने मुख्य सचिव (सीएस) से पूछा है कि प्रदेश के सभी 13 जिलों में अभी तक कितने मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा और चर्च सार्वजनिक स्थानों व सरकारी भूमि पर बनाए गए हैं। कोर्ट ने इसकी सूची एक सप्ताह में देने के निर्देश देते हुए कहा है कि सूची पेश नहीं करने पर मुख्य सचिव को चार मार्च को कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होना होगा।
मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ के समक्ष इन द मैटर ऑफ रिमूवल ऑफ इललीगल रिलिजियस स्ट्रक्चर ऑन द पब्लिक लैंड के रूप में जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। याचिका में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पब्लिक लैंड पर अवैध रूप से बनाए गए मंदिर मस्जिद चर्च और गुरुद्वारों को नहीं हटाया गया।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 2009 में एक आदेश जारी कर सभी राज्यों को निर्देश दिए थे कि वे सार्वजनिक स्थानों व सरकारी भूमि पर अतिक्रमण करके बनाए गए मंदिर-मस्जिद गुरुद्वारा और चर्चों को हटाएं। कहा कि अभी तक उत्तराखंड सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया है।