स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी ने स्वीकार किया कि प्रदेश में डाक्टरों के 60 फीसदी पद रिक्त हैं। अब तक 450 डाक्टरों की नियुक्तियां की गई हैं, जिसमें से 300 ने कार्यभार भी ग्रहण कर लिया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 150 बीडीएस डाक्टरों की तैनाती के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। जिला अस्पतालों में विश्व बैंक की मदद से विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति की जाएगी।
रविवार को नैनीताल क्लब में पत्रकारों से बातचीत में स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि प्रदेश में 2450 स्वीकृत पदों के सापेक्ष 950 पद ही भरे गए हैं। उन्होंने कहा कि विभिन्न माध्यमों से वर्ष 2015 के भीतर 1000 डाक्टरों की नियुक्ति के हरसंभव प्रयास किए जाएंगे, जिससे मरीजों को बेहतर इलाज मिल सके। श्री नेगी ने कहा कि आयुर्वेदिक डाक्टरों को एथोपैथिक दवाएं लिखने का अधिकार दे दिया गया है, इसके लिए उन्हें तीन माह का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सरकार ने डाक्टरों की नियुक्ति के लिए उत्तराखंड स्वास्थ्य चयन बोर्ड का गठन कर लिया गया है।
नेगी ने कहा कि भारत सरकार की ओर से शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए संचालित मिशन इंद्रधनुष के सफल क्रियान्वयन के हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। इस मिशन के तहत देश के कुल 201 जिलों को शामिल किया गया है, जिसमें उत्तराखंड का एक जिला हरिद्वार भी शामिल है। हरिद्वार में यह मिशन सात अप्रैल 2015 से चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बीती एक अप्रैल से शुरू हुई मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत 4000 से अधिक लोगों का निशुल्क इलाज किया जा चुका है, जिसमें एक करोड़ 98 लाख की धनराशि खर्च हो चुकी है। इसके अलावा विभाग की ओर से स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रम, खुशियों की सवारी, तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम का सफल क्रियान्वयन किया जा रहा है। वार्ता में युवा कांग्रेसी नेता त्रिभुवन सिंह फर्त्याल, विधायक प्रतिनिधि मुन्नी तिवारी मौजूद थीं।
सरकार की नीयत साफ है
प्रदेश में वर्तमान में चल रहे आपदा घोटाला प्रकरण पर स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र नेगी ने कहा कि मामले में सरकार की नीयत साफ है। मामला संज्ञान में आते ही मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित कर दी है और जांच चल रही है। उन्होेंने कहा कि आरटीआई के तहत आपदा घोटाले में जो खुलासा हुआ है, यदि वह गलत साबित होता है तो आरटीआई में गलत सूचना देने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।