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ज्योलीकोट में स्वास्थ्य संकट :पीछा नहीं छोड़ रहा पीलिया का काला साया, 23 नए मरीज भर्ती; अब तक 183 बीमारी

Fri, 11 Sep 2026 10:59 PM IST
Heera अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल

सार

दूषित पानी से बीमार पड़े 15 मरीजों का इलाज बेस अस्पताल और 12 मरीजों का सुशीला तिवारी अस्पताल में चल रहा है। सीएमओ के अनुसार चिकित्सा टीमें प्रभावित गांवों में घर-घर जाकर सैंपलिंग कर रही हैं।
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सुशीला तिवारी अस्पताल हल्द्वानी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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ज्योलीकोट क्षेत्र के गांवों में दूषित पेयजल से फैला पीलिया, टाइफाइड और डायरिया का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार को पीलिया के 23 नए मरीज भर्ती किए गए, जबकि 58 मरीजों का पहले से उपचार चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अब तक 183 मरीजों में पीलिया की पुष्टि हो चुकी है। वहीं, प्रभावित क्षेत्रों में रोगियों का आंकड़ा 250 के पार पहुंच गया है। सुशीला तिवारी अस्पताल में भर्ती एक बच्चे की हालत गंभीर बताई जा रही है।

दूषित पानी से बीमार पड़े 15 मरीजों का इलाज बेस अस्पताल और 12 मरीजों का सुशीला तिवारी अस्पताल में चल रहा है। सीएमओ डॉ. रश्मि पंत ने बताया कि चिकित्सा इकाइयों की टीमें प्रभावित गांवों में घर-घर जाकर सैंपलिंग कर रही हैं। लोगों को आयुष्मान योजना में सूचीबद्ध और गैर सूचीबद्ध अस्पतालों की जानकारी भी दी जा रही है।

सरियाताल में पहुंच रहा सीवर का पानी

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ज्योलीकोट के बाद अब नैनीताल के समीपवर्ती खुर्पाताल से लगे सरियाताल में भी सीवर का पानी पहुंच रहा है। ग्रामीण की शिकायत पर ब्लॉक प्रमुख डॉ. हरीश सिंह बिष्ट ने औचक निरीक्षण किया तो जिम्मेदार विभागों की यह घोर लापरवाही उजागर हुई। ब्लॉक प्रमुख ने अधिकारियों को जल्द सुधार न होने पर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने की भी चेतावनी दी।

ब्लॉक प्रमुख डॉ. बिष्ट को निरीक्षण के दौरान यहां खुली सीवर लाइनों की लीकेज का गंदा पानी सरिताताल में जाता हुआ दिखा। ग्रामीणों ने जलस्रोतों के भी प्रदूषित होने का अंदेशा जताया। ग्रामीणों का कहना था कि खुर्पाताल, बजून, मंगोली, नलनी सिल्मोडिया और खमारी गावों में इन्हीं जलस्रोतों से पेयजल आपूर्ति होती है। ऐसे में क्षेत्र में पीलिया और डायरिया जैसे संक्रामक रोग फैलने का खतरा बना हुआ है।

झील के पानी को प्रदूषित होते देख ब्लॉक प्रमुख ने जल संस्थान, जल निगम, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। कहा कि सीवर का गंदा पानी पेयजल स्रोतों में समा रहा है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण और ग्रामीणों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगा। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में यदि कोई भी जल जनित बीमारी फैलती हैं तो इसकी जिम्मेदारी विभाग की होगी। इस दौरान जल संस्थान के अधिशासी अभियंता अनीश पिल्लई, जल निगम के अधीक्षण अभियंता शशि पाल, सहायक अभियंता मनमोहन रावत, प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. हेमंत मर्तोलिया, ग्राम प्रधान हंसी नेगी, प्रेमा मेहरा मौजूद रहे।

प्रभावित गांवों में पहुंचे स्वास्थ्य निदेशक
स्वास्थ्य निदेशक डॉ. केके अग्रवाल ने शुक्रवार को सीएमओ डॉ. रश्मि पंत और संयुक्त निदेशक डॉ. योगेश चंद्र पुरोहित के साथ ज्योलीकोट पीएचसी और प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। उन्होंने बीमारी की रोकथाम के लिए नौ सूत्री कार्ययोजना पर प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए। प्रभावित क्षेत्रों को उच्च, मध्यम और निम्न जोखिम वाली तीन श्रेणियों में बांटकर निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में सघन निगरानी और पेयजल नमूनों की प्राथमिकता से जांच, मध्यम जोखिम वाले क्षेत्रों में नियमित स्वास्थ्य परीक्षण तथा निम्न जोखिम वाले क्षेत्रों में सतर्क निगरानी रखने को कहा गया है। पेयजल स्रोतों में सुपरक्लोरीनेशन कराने के साथ जिला और ब्लॉक स्तर की रैपिड रिस्पांस टीमों को अलर्ट मोड पर रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।

टैंकरों से पहुंचाया जा रहा शुद्ध पानी

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ज्योलीकोट और आसपास के क्षेत्रों में जल संस्थान टैंकरों के माध्यम से पेयजल उपलब्ध करा रहा है। डीएम ललित मोहन रयाल ने स्थिति सामान्य होने तक टैंकरों से पानी की आपूर्ति जारी रखने के निर्देश दिए हैं। पेयजल टैंकों, स्रोतों और पाइपलाइनों का निरीक्षण कर सफाई और क्लोरीनेशन का काम तेज कर दिया गया है। अधिकारियों ने क्षेत्र से पानी के आठ नमूने लिए हैं। विभाग के दो टैंकर और एक पिकअप वाहन ने 10 स्थानों पर पेयजल वितरित किया। पीपीजे स्कूल कृष्णापुर से एसटीपी तक 390 मीटर सीवर लाइन बिछाने का काम भी पूरा कर लिया गया है। हेल्पलाइन पर मिली 21 शिकायतों में से 19 का निस्तारण किया जा चुका है।

163 लोगों की जांच, खून के 65 और पानी के चार नमूने लिए
सीएमओ डॉ. रश्मि पंत के अनुसार शुक्रवार को विभिन्न स्वास्थ्य शिविरों में 163 लोगों की जांच की गई। पीएचसी ज्योलीकोट में 98 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया जिनमें 13 मरीजों को भर्ती किया गया। प्रभावित क्षेत्रों में रैपिड किट से घर-घर सैंपलिंग की गई। खून के 65 और पानी के चार नमूने जांच के लिए लिए गए हैं। सचल चिकित्सा वाहन से भी 43 लोगों की जांच की गई। 12 सितंबर को हल्द्वानी के वरिष्ठ एमडी फिजीशियन डॉ. जेसी भंडारी और उनकी टीम विशेष ओपीडी सेवा देगी।

फ्लू-डायरिया मरीजों के लिए अलग कक्ष
बीडी पांडे अस्पताल प्रशासन ने फ्लू और डायरिया के बढ़ते मामलों को देखते हुए मरीजों के लिए अलग-अलग कक्ष की व्यवस्था की है। अस्पताल में मरीजों को उपचार के साथ आवश्यक जांच और दवाएं निशुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी। वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अंजनी कुमार ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में फ्लू और उल्टी-दस्त के मरीजों की संख्या बढ़ी है।

प्रभावितों को मुआवजा देने की मांग
 ग्राम प्रधान डॉ. बबिता मनराल ने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर दूषित पेयजल से बीमार हुए लोगों और मृतकों के आश्रितों को मुआवजा देने की मांग की है। उन्होंने दावा किया कि दूषित पानी के सेवन से तीन लोगों की मौत हो चुकी है और 300 से 400 लोग बीमार हैं। साथ ही मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग भी की है।

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