शहर की सबसे पुरानी रामलीला के मंचन को लेकर असमंजस की स्थिति अभी भी बरकरार है। रामलीला के लिए नए सिरे से हरिशरणम् जन संस्था को मनाने की कोशिश तेज हुई है। उम्मीद लगाई जा रही है कि एक-दो दिन में तस्वीर साफ हो जाएगी। इसके लिए ‘पर्दे’ के पीछे से कई प्रभावशाली लोगों के शामिल होने की चर्चा है।
श्री रामलीला कमेटी की रामलीला मंचन को लेकर उहापोह की स्थिति बनी हुई है। पहले रामलीला कमेटी का विवाद, आंदोलन और कमेटी भंग होने होने के एपिसोड हो चुके हैं। इसके बाद तय हुआ कि नई रामलीला कमेटी बनाकर मंचन कराया जाए, लेकिन विवाद की आशंका के चलते इससे भी हाथ खींच लिए गए।
बाद में प्रशासन ने संसाधन से युक्त और विवादों के पचड़े से बची हुई हरिशरणम् संस्था से रामलीला मंचन कराने का फैसला किया। शुरुआत में संस्था मान गई, लेकिन विरोध होने पर संस्था ने रामलीला कराने से हाथ खड़े कर दिए।
अब एक बार फिर शहर की सबसे प्रतिष्ठित रामलीला के मंचन को लेकर संशय की स्थिति बन गई है। शहर में इसको लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। ‘मलाल’ करने की स्थिति न आए, इसके लिए मंचन कराने और सफल बनाने की कोशिश में प्रशासन लगा हुआ है।
बताया जाता है कि हरिशरणम् संस्था को ही मनाने की कोशिश हो रही है। इसके लिए हर स्तर से प्रयास किया जा रहा है। उम्मीद है कि संस्था रामलीला कराने को मान जाए और विवाद और दुविधा पर अंतिम पर्दा गिर जाए।
सोशल मीडिया पर छाया रामलीला विवाद
सोशल मीडिया पर भी प्राचीन रामलीला के मंचन को लेकर हुआ विवाद छाया है। फेसबुक और ह्वाट्सएप पर लोग बैठक में विघ्न डालने वालों पर जमकर भड़ास निकाल रहे हैं। लोग शहर की सबसे प्राचीन रामलीला हरिशरणम् जन से कराने का अनुरोध कर रहे हैं।
सिटी मजिस्ट्रेट ने रामलीला मंचन की जिम्मेदारी हरिशरणम् जन संस्था को सौंपी थी। सोमवार को रामलीला की तैयारियों को लेकर बैठक आयोजित हुईं। बताया जाता है कि इसमें एक व्यक्ति ने रामलीला हरिशरणम् जन के माध्यम से कराने का विरोध किया था।
इसके बाद संस्था प्रमुख स्वामी राम गोविंद दास भाईजी ने रामलीला मंचन कराने से मना कर दिया। इसकी सूचना ह्वाट्सएप और सोशल मीडिया पर भी प्रसारित हो गयी। फेसबुक पर निलेश देवल, शैलेंद्र सिंह दानू, मोहित शाक्य ने लिखा है कि बैठक में विघ्न डालने वाले ने शर्मसार किया है।
व्यापारी नेता जसविंदर सिंह भसीन ने धार्मिक संस्था को फिर से रामलीला मंचन पर विचार करने का अनुरोध किया है। भाजयुमो के जिलाध्यक्ष एवं रामलीला के कलाकार मदन मोहन जोशी ने कहा है कि कुछ लोगों की राजनीति के चलते हरिशरणम् जन ने अपना हाथ रामलीला से खींच लिया।
उन्होंने संस्था प्रमुख से रामलीला कराने का अनुरोध किया है। पार्षद हितेश पांडे कहते हैं कि रामलीला कमेटी के पूर्व पदाधिकारियों द्वारा जबरदस्ती का विवाद पैदा किया जा रहा है। रामलीला कमेटी किसी व्यक्ति विशेष की नहीं है।
पांडेय निवास के अंशु पांडेय का कहना कि व्यक्तिगत फायदे के चलते 130 साल की रामलीला का यह हाल हुआ है। रामलीला के मंचन पर विराम कोई बर्दाश्त नहीं करेगा। कांग्रेस कमेटी के प्रदेश सचिव ललित जोशी कहते हैं रामलीला कराने की जिम्मेदारी हरिशरणम् जन संस्था को देनी चाहिए।
वित्त मंत्री ने किया रामलीला कराने का अनुरोध
हरिशरणम् जन के प्रमुख स्वामी राम गोविंद दास ने बताया कि वित्त मंत्री इंदिरा हृदयेश ने देहरादून से फोन कर उनसे रामलीला की जिम्मेदारी लेने का अनुरोध किया है । उन्होंने बताया कि मंत्री के शहर में आने के बाद इस मामले में बातचीत कर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।