सौर ऊर्जा को बढ़ावा दे रही केंद्र सरकार के प्रोजेक्टों में अब पॉलीटेक्निक, आईटीआई या डिप्लोमा करने वालों के लिए रोजगार के अवसर मिलेंगे। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोलर एनर्जी (भारत सरकार) ऐसे छात्रों को सौर ऊर्जा के क्षेत्र में तीन माह की ट्रेनिंग दिलाएगी और कैंपस सेलेक्शन भी कराएगी।
एक बैच के ट्रेनिंग कोर्स पर करीब 13 लाख 60 हजार रुपये का खर्च आएगा। इसके लिए फंडिंग राज्य सरकार करेगी। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोलर एनर्जी (भारत सरकार) की ओर से पॉलीटेक्निक, आईटीआई या डिप्लोमा कर चुके छात्रों को तीन-तीन माह की ट्रेनिंग कराई जाएगी।
इसमें छात्रों को एक माह फील्ड में और दो माह क्लास के माध्यम से ट्रेनिंग दी जाएगी। उत्तराखंड के लिए आठ ट्रेनिंग कोर्स कराने की अनुमति मिली है। कोस के एक बैच में 30 से 35 विद्यार्थी होंगे। पॉलीटेक्निक शुद्धोवाला देहरादून एवं इंस्टीट्यूट ऑफ लर्निंग एंड ट्रेनिंग ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में कोर्स कराया जा चुका है।
लोहाघाट पॉलीटेक्निक और देहरादून इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियर्स में सितंबर में कोर्स शुरू होगा। इसके अलावा पिथौरागढ़ और चमोली पॉलीटेक्निक में कोर्स शुरू कराने के लिए उरेडा के अधिकारी बात करेंगे। ट्रेेनिंग करने वालों को सर्टिफिकेट दिया जाएगा।
खास बात ये है कि ट्रेनिंग पर आने वाला खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। एक ट्रेनिंग प्रोग्राम पर लगभग 13 लाख 60 हजार रुपये का खर्च आएगा।
60 विद्यार्थी ट्रेनिंग ले चुके हैं। इनमें से 70 प्रतिशत बच्चों को रोजगार मिल चुका है। उरेडा ऐसे बच्चों को सौर ऊर्जा के क्षेत्र में काम करने वाली निजी कंपनियों में कैंपस सेलेक्शन कराएगी। सौर ऊर्जा संबंधी ट्रेनिंग करने से रोजगार के अवसर भी लोगों को लिए खुलेंगे।
- एके त्यागी, मुख्य परियोजना अधिकारी, उरेडा