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आज से शिवालयों में गूंजेगा हर-हर महादेव

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हल्द्वानी/भीमताल। 19 जुलाई को होने वाले सावन के पहले सोमवार को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह है। जिले के शिवालयों में पूजा अर्चना की तैयारियां पूरी हो गई हैं। कोविड नियमों के तहत श्रद्धालुओं को पूजा की अनुमति दी जाएगी।
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देवभूमि में आस्था के केंद्र मंदिरों की संख्या काफी है। खासकर कुमाऊं में 500 से अधिक शिवालय हैं जिनमें कुछ ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व के भी हैं। शिवरात्रि के बाद पूरे सावन में घर-घर और मंदिरों में शिव पूजे जाते हैं।
सिद्धेश्वर महादेव मंदिर: सिद्ध होते हैं हर काम
हल्द्वानी में स्थित सिद्धेश्वर महादेव मंदिर (नानतिन बाबा आश्रम) के प्रति भक्तों का अटूट विश्वास है। यहां बारह महीने श्रद्धालु आते हैं। शिवरात्रि और सावन में यहां हजारों लोग पहुंचते हैं।
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बेलबाबा मंदिर: आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र
रामपुर रोड में हरिपुर फुटकुआं में बेलबाबा का मंदिर है। कहा जाता है कि 100 साल पहले मंदिर की जगह एक बेल का पेड़ था, उसी के नीचे एक महात्मा रहते थे। बाद में वहां महात्मा की पवित्र समाधि बना दी गई। उसके बाद स्थानीय लोगों के सहयोग से भव्य शिव मंदिर का निर्माण किया गया। यह श्रद्धालुओं की आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है।
छोटा कैलाश: यहां आते हैं हजारों श्रद्धालु
भीमताल के छोटा कैलाश, भीमेश्वर महादेव मंदिर भीमताल और मुक्तेश्वर महादेव मंदिर में भी लोग भगवान शिव की पूजा करने पहुंचते हैं। पिनरों स्थित छोटा कैलाश को भगवान शिव का निवास कहा जाता है। यहां हर साल शिवरात्रि और सावन में सैकड़ों भक्त पहुंचते हैं।
हरिशयनी एकादशी का व्रत कल
हल्द्वानी। हरिशयनी एकादशी का व्रत 20 जुलाई को होगा। ज्योतिष डॉ. नवीन चंद्र जोशी ने बताया कि हरिशयनी एकादशी से भगवान विष्णु जल में शयन करते हैं। इस अवधि को चातुर्मास भी कहा जाता है। इस अवधि में कोई मांगलिक कार्य नहीं होते हैं क्योंकि भगवान विष्णु के शयन यानी निद्रा में जाने से विवाह आदि कार्य नहीं होते हैं। इस दिन घर में तुलसी का पौधा लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है। हरिप्रबोधिनी एकादशी यानी15 नवंबर तक चातुर्मास रहेगा तब तक मांगलिक कार्य बंद रहेंगे। 15 नवंबर को तुलसी विवाह के बाद मांगलिक कार्य शुरू होंगे। उन्होंने बताया तुलसी रोपण सुबह आठ बजे तक या दो बजे के बाद करना चाहिए।
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