हल्द्वानी। नैनीताल को झील के कारण लेक सिटी का खिताब मिला हुआ है, अब हल्द्वानी को भी झील नगरी की पहचान दिलाने की कोशिश है। वन विभाग ने अंतरराष्ट्रीय चिड़ियाघर में पहले चरण में दो हेक्टेयर (32 बीघा) एरिया में झील बनाने की योजना पर काम शुरू किया है।
400 हेक्टेयर में अंतरराष्ट्रीय चिड़ियाघर प्रस्तावित है। इसमें वन विभाग ने दो हेक्टेयर में केवल कृत्रिम झील विकसित करने की योजना पर काम शुरू किया है। वनाधिकारियों के अनुसार झील के जरिये कई लक्ष्यों को पूरा किया जाएगा।
पहला चिड़ियाघर एक बड़े इलाके में बन रहा है, ऐसे में जो भी बरसात का पानी आयेगा उसका संरक्षण (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) हो सकेगा। इसके अलावा सैलानियों के लिये झील का एक विकल्प और मौजूद होगा। एसडीओ जीएस कार्की कहते हैं कि यह अपने तरह की हल्द्वानी और आसपास की पहली कृत्रिम झील होगी।
झील के आसपास फलदार, बैंबू प्रजातियों का जंगल तैयार किया जाएगा, जिसका काम शुरू किया गया है। इसके अलावा पानी के अंदर के उगने वाले पौधों को लगाया जायेगा, जिसमें मछली, चिड़ियों के लिए छोटे-छोटे कीट पनप सकें।
तराई में कई हरिपुरा, तुमड़िया जैसे जलाशय हैं, जहां पर जाड़े में साइबेरियन बर्ड (माइग्रेशन बर्ड) आती हैं, उम्मीद है कि उसी तरह यहां भी यह चिड़िया पहुंचेंगी। झील को उसी तर्ज पर विकसित किया जाएगा। साइबेरियन बर्ड के आने से लोगों को एक और आकर्षण मिलेगा।
सीईओ डा. पराग मधुकर धकाते कहते हैं कि चिड़ियाघर को बिजली, पानी आदि के मामले में अधिकतम आत्म निर्भर बनाने की कोशिश है। इसको भी ध्यान में रखकर कृत्रिम झील बनाने की योजना पर काम शुरू किया गया है।
पूरे इलाके में तीन से चार छोटे नाले हैं, जिनके माध्यम से झील को भरा जाएगा। इसके अलावा झील में जमा पानी का भी इस्तेमाल जू के आवश्यक कार्यों के लिये भी हो सकेगा। हालांकि विभाग अपना नलकूप भी लगायेगा। झील निर्माण का प्रारंभिक कार्य शुरू कर दिया गया है।