हल्द्वानी, टोक्यो ओलम्पिक में भारतीय टीम की ड्रेस डिजाइन करने वाली हल्द्वानी की युवती इदित्री ग?
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हल्द्वानी। शहर की बेटी के नाम एक बड़ी उपलब्धि दर्ज हुई है। टोक्यो में चल रहे ओलंपिक खेलों में भाग लेने गए भारतीय दल के परिधानों के डिजाइन हल्द्वानी की इदित्री गोयल ने तैयार किए हैं। वह भारतीय ओलंपिक संघ की उत्तराखंड से एकमात्र फैशन डिजायन कंसलटेंट हैं।
बकौल इदित्री जब उन्हें पता चला कि ओलंपिक खेलों के लिए भारतीय ओलंपिक संघ को डिजाइनरों की तलाश है तो उन्होंने भी आवेदन कर दिया। उनके प्रोफाइल को देखते हुए भारतीय ओलंपिक संघ ने उनके आवदेन को स्वीकार कर लिया और उन्हें डिजाइन कंसलटेंट बनाया। इदित्री ने बताया कि नियम कड़े थे और ओलंपिक संघ की तय गाइडलाइन के अनुसार ही डिजाइन प्रस्तुत करने थे, इसके लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ी। तीन से चार महीने में काफी डिजाइन बनाए, उसमें एक डियाइन संघ को पसंद आ गया। भारत की संस्कृति, परंपरा और सौंदर्य को ध्यान में रखते हुए परिधानों को डिजाइन किया गया था। उनके लिए यह पल दुनिया जीतने जैसा रहा। वह बताती हैं कि यह सब टीम वर्क था जो भारतीय ओलंपिक संघ की मदद से हुआ।
नैनीताल रोड पर वैशाली कॉलोनी निवासी 27 वर्षीय इदित्री ने इंटर तक निर्मला कान्वेंट हल्द्वानी से पढ़ाई की। वह हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में टॉपर रहीं। इसके बाद उन्होंने मिरेंडा हाउस दिल्ली से बीए स्नातक किया। फैशन को कॅरियर बनाने की चाहत के चलते वह मिलान (इटली) चलीं गईं, जहां फैशन और लग्जरी ब्रांड में पढ़ाई की। 2016 से 2018 तक उन्होंने भारत में प्रसिद्ध और अंतरराष्ट्रीय फैशन डिजाइनर के साथ काम सीखा। 2018 से 2020 तक उन्होंने दिल्ली में रहकर ही लड़कियों के कपड़ों को लेकर माइल्ड वाइल्ड क्लोथिंग ब्रांड बनाया। इदित्री के पिता वीरेंद्र गोयल प्रसिद्ध व्यवसायी और मां आरती गोयल गृहिणी हैं। शेरवुड से पढ़ा भाई शिवेंद्र गोयल होटल और रेस्टोरेंट चलाता है।
मां की प्रेरणा और परिवार का मिला सहयोग
हल्द्वानी। मां आरती को अपनी प्रेरणा स्रोत बताते हुए इदित्री कहती हैं कि जब परिवार से सपोर्ट मिलता है तो हौसला बढ़ता है। उनके इस हौसले और उपलब्धि के पीछे उनकी मां का विशेष योगदान रहा है। इदित्री की मां आरती ने बताया कि आज वह गर्व महसूस करती हैं। बेटी ने लक्ष्य तय कर रखा था और उसमें वह कामयाब हुई। पिता वीरेंद्र गोयल ने बताया कि उनकी बेटी कुछ अलग करेगी यह तो पता ही था, इतनी बड़ी उपलब्धि की जानकारी उन्हें दो दिन पहले मिली।