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हल्द्वानी में सौ हेक्टेयर में बनेगा बंदरबाड़ा, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, हरिद्वार और चमोली में भी बनाने की योजना

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प्रतीकात्मक फोटो।
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हल्द्वानी। वन्यजीव और मानव संघर्ष पर अंकुश लगाने के लिए वन विभाग आगे आया है। इस कवायद के क्रम में कुमाऊं में हल्द्वानी व अल्मोड़ा में और गढ़वाल में हरिद्वार व चमोली जिले में भी दो बंदरबाड़े बनाने की योजना है। हल्द्वानी के तराई पूर्वी वन प्रभाग के दानीबंगर में सौ हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में बंदरबाड़ा और रेस्क्यू सेंटर बनेगा।
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बंदरों की समस्या से निपटने के लिए हल्द्वानी और पिथौरागढ़ में बंदरबाड़ा और अल्मोड़ा में बंदरों के साथ तेंदुओं का भी बाड़ा बनाने की योजना है। बंदरबाड़ा बनाने के लिए सेंट्रल जू अथॉरिटी (सीजेडए) की अनुमति की जरूरत होगी। तराई पूर्वी वन प्रभाग डीएफओ नीतिशमणि त्रिपाठी ने बताया कि जगह चिह्नित की जा चुकी है। सीजेडए से अनुमति मांगी गई है। वन संरक्षक पश्चिमी वृत्त जीवन चंद्र जोशी ने बताया कि सीजेडए से अनुमति मिलते ही कार्य शुरू कर दिया जाएगा। हरिद्वार डीएफओ नीरज शर्मा ने बताया कि शुरुआत में तीस हेक्टेयर में बाड़ा बनाने का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।
पांच-पांच हेक्टेयर के बीस बाड़े बनेंगे, रेस्क्यू सेंटर भी होगा
वन विभाग के मुताबिक, पांच-पांच हेक्टेयर के बीस बंदर बाड़े बनाए जाएंगे। इन बाड़ों को प्राकृतिक स्वरूप देने की भी कोशिश रहेगी। बाड़ों में कोई बंदर बीमार पड़ जाता है, तो उसके इलाज की सुविधा भी होगी। दो हेक्टेयर एरिया में बीमार बंदरों का इलाज करने के लिए रेस्क्यू सेटर बनाया जाएगा। साथ ही पशु चिकित्सक, स्टाफ के लिए आवास भी बनाया जाएगा।
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नौ नवंबर को शिलान्यास की तैयारी
हल्द्वानी। मुख्यमंत्री के विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बताया बाड़े सीजेडए के मानकों के हिसाब से तैयार होंगे। सीएम नौ नवंबर को इनका शिलान्यास करेंगे। हरिद्वार और हल्द्वानी में शुरुआती समय में दस-दस हजार बंदर रखने वाले बाड़े बनाए जाएंगे। वन संरक्षक प्रसन्न पात्रो ने बताया कि हरिद्वार-हल्द्वानी में पहले चरण में 16-16 हेक्टेयर क्षेत्रफल में कार्य प्रारंभ करने की योजना है।
पलायन आयोग की रिपोर्ट खेती को नुकसान का उल्लेख
हल्द्वानी। पलायन आयोग ने पलायन को लेकर रिपोर्ट तैयार की है। उसमें ग्राम पंचायत से पलायन के लिए कई बातों का जिक्र किया गया है। इसमें रोजगार, चिकित्सा आदि कारणों का उल्लेख है। इसी क्रम में सातवें स्थान पर राज्य में पलायन (5.61 प्रतिशत) का एक कारण जंगली जानवरों द्वारा कृषि को हानि पहुंचाने को माना गया है। वन्यजीव खेती के लिए परेशानी का सबब बन चुके हैं। बंदर, सूअर के अलावा हाथी भी खेती को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
खेती के प्रति रुझान कम
नैनीताल जिले में बंदर, सूअर के कारण खेती के प्रति लोगों का रुझान कम हो रहा है। भीमताल विधायक राम सिंह कैड़ा ने बताया कि ओखलकांडा, भीमताल, धारी और रामगढ़ ब्लाक में लोग खेती करना छोड़ रहे हैं। करीब हर ग्राम सभा प्रभावित है। वन्यजीव खेती को खासा नुकसान पहुंचा रहे हैं।
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