एक शख्स अब्दुल मलिक के चलते पूरे शहर का अमन-चैन छिन गया। मलिक ने अपने रसूख से अवैध कब्जे के किले मजबूत किए, उसमें सरकारी महकमे घुसने की कोशिश करने से पहले सोचते थे। आठ फरवरी को सरकारी महकमे पहुंचे तो जमकर पथराव और आगजनी हुई। पुलिस को गोली चलानी पड़ी। इसके चलते पूरे शहर में कर्फ्यू लगा। अवाम दहशत में है। एक बड़े इलाके के लोग अभी भी कर्फ्यू झेल रहे हैं। 70 हजार की आबादी एक दायरे में कैद जैसी है।
मलिक के बगीचे में स्टांप पर जमीन खरीदने बेचने का खेल चला। यहां देखते ही देखते मकान बन गए। तुलनात्मक तौर पर सस्ती जमीन, सरकारी प्रक्रिया का झंझट नहीं होने के कारण लोगों ने खरीदारी में दिलचस्पी दिखाई। इस पूरे खेल का रिमोट मलिक के पास था। उसका साम्राज्य अभेद्य बना हुआ था। ऐसे में जब कार्रवाई शुरू हुई तो हिंसा शुरू हो गई, जिस तरह से हमला किया गया, पेट्रोल बम से लेकर आगजनी और पथराव किया गया, उसको अचानक हुई प्रतिक्रिया नहीं माना जा रहा है।