प्राइमरी पाठशालाओं में तैनात अध्यापक अब बच्चों को पढ़ाना छोड़ अपने किसी भी कार्य के लिए शिक्षा निदेशालय नहीं जा सकेंगे। शासन ने इस पर तत्काल प्रभाव से पाबंदी लगा दी है। निदेशालय जाने के लिए अध्यापकों को अपने जिला स्तरीय अधिकारियों की अनुमति लेनी होगी। निदेशालय में वे अनुमति पत्र दिखाने के बाद ही किसी आला अफसर से मिल सकेंगे।
प्रारंभिक शिक्षा निदेशक सीमा जौनसारी ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को इस आदेश को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की सेवा एवं स्थानांतरण संबंधी छोटी-छोटी समस्याओं का समुचित समाधान जिला स्तर पर सक्षम अधिकारी द्वारा समय पर नहीं होने के कारण वे देहरादून की ओर रुख करते हैं।
इससे समय की बर्बादी के साथ-साथ स्कूलों में शिक्षण कार्य भी बाधित होता है। शासन ने इस स्थिति को गंभीरता से लिया है। प्रारंभिक शिक्षा निदेशक ने निर्देश दिए हैं कि अध्यापकों की सेवा संबंधित समस्याओं के निस्तारण में अनावश्यक विलंब न कर उनका निराकरण सक्षम स्तर से ही किया जाए।
यदि प्रकरण का निस्तारण उच्चस्तर से होना है तो ऐसे प्रकरण को बिना विलंब किए पत्रावली में लाते हुए सक्षम स्तर को भेजा जाए एवं सूचना से संबंधित अध्यापक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारी को भी अवगत कराया जाए।
अध्यापक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को यह अवश्य बताया जाए कि सक्षम स्तरों की समस्या के लिए कोई अध्यापक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारी शासन या मंत्रालय में आते हैं तो ऐसे अध्यापक या कर्मचारी को संबंधित अधिकारी से मिलने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी (बेसिक) द्वारा अग्रसारित अनुमति पत्र पर निदेशक, प्रारंभिक शिक्षा की संस्तुति के लिए होना जरूरी है।
जिला शिक्षा अधिकारी (बेसिक) गोपाल स्वरूप भारद्वाज ने बताया कि इसका अनुपालन सख्ती से कराए जाने के लिए समस्त बीईओ को निर्देशित कर दिया गया है।