फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सरकार बचाने के लिए आंख मूंदे रहे मुख्यमंत्री हरीश रावत

Tue, 31 Jan 2017 01:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो हल्द्वानी
विज्ञापन
सीएम हरीश रावत - फोटो : file photo
विज्ञापन
सोमवार को मुख्यमंत्री हरीश रावत ने स्वीकार किया कि प्रदेश में सत्ता संभालने के बाद के दौर में वे मजबूर मुख्यमंत्री साबित हुए। रावत के मुताबिक सरकार बचाने के लिए वे मंत्रियों के खिलाफ शिकायतों को नजरअंदाज करने को मजबूर हुए।
विज्ञापन


रावत ने साफ कहा कि पूर्व कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य के खिलाफ सहकारी बैंकों में भरती को लेकर शिकायत थी। हरक सिंह रावत को मंत्रिमंडल में रखना उनकी सबसे बड़ी मजबूरी थी। रावत ने एक पूर्व कांग्रेसी विधायक को भी निशाने पर लिया।

सोमवार को हल्द्वानी पहुंचे मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि यशपाल आर्य के खिलाफ सहकारी बैंकों में भरती को लेकर मिली शिकायतें कार्यवाही की ओर संकेत कर रही थीं। बहुमत बनाए रखने की मजबूरी के चलते उन्हें कार्यवाही से परहेज करना पड़ा।
विज्ञापन


रावत ने कहा कि सत्ता संभालने के बाद सरकार को बहुमत में बनाए रखने के लिए कांग्रेस के बागी नेताओं से समझौता करना उनकी मजबूरी थी। जिन नेताओं से समझौता नहीं हो पाया, वे मार्च 2016 में पार्टी छोड़कर चले गए।

रावत ने कहा कि एक विधायक ने तो सिर्फ मलिन बस्तियों को नियमित करने के कानून लाने के कारण बगावत की। विधायक कानून में संशोधन चाहते थे। मलिन बस्तियों की जमीन हथियाने में विधायक के समर्थक खुलकर शामिल थे।

मुख्यमंत्री की नाराजगी हरक सिंह रावत को लेकर अधिक दिखी। रावत ने कहा कि हरक सिंह रावत जैसे व्यक्ति को मंत्रिमंडल में रखना सबसे बड़ी मजबूरी थी। उल्लेखनीय है कि 18 मार्च, 2016 को सदन में कांग्रेस के विजय बहुगुणा, हरक सिंह सहित कई विधायकों ने बगावत कर भाजपा का दामन थामा था।

चुनाव नजदीक आने के साथ ही पूर्व मंत्री यशपाल आर्य भी कांग्रेस का साथ छोड़ गए थे। आर्य कांग्रेस कार्यकाल में सहकारिता मंत्री रहे और सहकारिता में भी कई नेता उनकी भूमिका को लेकर मुख्यमंत्री हरीश रावत से शिकायत करते रहे। इसके बावजूद रावत ने चुप्पी साध कर रखी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें