जरबेरा महक रहा पर नहीं मिल रहे कद्रदान
चोरगलिया और गौलापार के फूल काश्तकारों की बेबसी
कन्नू रूवाली
चोरगलिया। कोविड कर्फ्यू में जिन्हें सर्वाधिक नुकसान हुआ है उनमें फूल काश्तकार भी शामिल हैं। फूलों की खेती कर रहे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। बाजार में मांग न होने के कारण फूलों की बेकद्री हो रही है। लाखों का लोन लेकर फूलों की खेती करने वाले काश्तकार अधिक परेशान हैं। उन्हें बैंक की किस्त जमा करना भारी पड़ रहा है।
चोरगलिया और गौलापार के जरबेरा की हल्द्वानी मंडी और दिल्ली में अधिक मांग रहती है। खासकर विवाह समारोह में मंडप सजाने में इन फूलों का प्रयोग होता है। पिछले साल लॉकडाउन में आर्थिक नुकसान की अभी भरपाई नहीं हुई थी, इस बार कोविड कर्फ्यू से काश्तकारों की मेहनत पर पानी फिर गया। काश्तकार परेशान हैं। घर चलाना मुश्किल हो रहा है। वे भी सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं।
केस 01
चोरगलिया के किसान प्रेम बजेठा का कहना है कि विवाह मंडप, बर्थडे और गुलदस्ता सजाने के लिए जरबेरा और अन्य प्रजाति के फूलों की अधिक मांग रहती थी लेकिन एक साल से बाजार नहीं मिल रहा है, इस कारण फूलों को कूड़े में फेंकने की मजबूरी है। फूलों के बीज व दवाइयां महंगी आती हैं। उन्होंने दो बीघा में जरबेरा उगाने के लिए 5 साल का लोन लिया था। सारी मेहनत बेकार चली गई है।
केस 02
लखनपुर गौलापार में जरबेरा फूल की खेती करने वाले पवन नेगी के अनुसार गाढ़ी कमाई से पॉलीहाउस में फूलों की खेती की थी। पहले लॉकडाउन और अब कर्फ्यू से अरमानों पर पानी फिर गया। अब दुकान खुलने का आदेश आया तो 10 रुपये में बिकने वाले फूल की कीमत मात्र दो रुपये में मिल रहे हैं। हम भुखमरी के दौर से गुजर रहे हैं।