सनातन धर्म में गंगा दशहरा का पर्व अत्यन्त पुण्यदायी एवं पापों का नाश करने वाला माना गया है। स्कन्दपुराण सहित विभिन्न धर्मग्रन्थों में वर्णित है कि गंगा दशहरा के दिन स्नान, दान, जप एवं पूजन करने से मनुष्य के दस प्रकार के पाप नष्ट होते हैं। इनमें तीन शारीरिक, चार वाचिक तथा तीन मानसिक पाप बताए गए हैं। इसी कारण इस पर्व को “दशहरा” कहा गया है।
ज्योतिष एवं धर्मशास्त्र के अनुसार जिस दिन निम्न दस योगों में अधिकाधिक योग प्राप्त हो उसी दिन गंगा दशहरा मनाना श्रेष्ठ माना गया है—
- ज्येष्ठ मास
- शुक्ल पक्ष
- दशमी तिथि
- बुधवार
- हस्त नक्षत्र
- व्यतीपात योग
- गर करण
- आनन्द योग
- वृष राशि में सूर्य
- कन्या राशि में चन्द्रमा
इस वर्ष 25 मई 2026 को इन योगों में सर्वाधिक योग प्राप्त हो रहे हैं एवं अन्य शुभ योगों का भी उत्तम संयोग बन रहा है। इसलिए अधिक ज्येष्ठ मास होते हुए भी गंगा दशहरा का पर्व 25 मई को ही मनाया जाना पूर्णतः शास्त्रसम्मत है।
धर्मशास्त्रों में स्पष्ट उल्लेख मिलता है कि यदि ज्येष्ठ मास अधिकमास रूप में प्राप्त हो, तो गंगा दशहरा का निर्णय अधिक ज्येष्ठ में ही किया जाता है, न कि शुद्ध ज्येष्ठ में। इसी आधार पर उत्तराखण्ड सहित अधिकांश उत्तर भारत में 25 मई को गंगा दशहरा मनाया जाएगा। सिद्धान्त भेद और पंचांग गणना की विभिन्न पद्धतियों के कारण पूर्वी भारत के कुछ क्षेत्रों में कहीं-कहीं 26 मई को भी गंगा दशहरा मनाया जा सकता है, किन्तु उत्तराखण्ड में बिना किसी संशय के 25 मई 2026 रविवार को ही गंगा दशहरा पर्व मनाना चाहिए।
गंगा दशहरा के दिन प्रातःकाल गंगास्नान अथवा गंगाजल मिश्रित जल से स्नान करना, दस प्रकार के दान देना, शिव पूजन करना तथा “ॐ नमः शिवाय” एवं “गंगे च यमुने चैव…” मंत्रों का जप करना अत्यन्त पुण्यदायी माना गया है। इस दिन कुल पुरोहित को घर आमंत्रित कर भोजन एवं दक्षिणा देना, घर के द्वार पर गंगा दशहरा द्वारपत्र लगाना तथा धर्मानुसार दान-पुण्य करना विशेष मंगलकारी माना गया है।
इस दिन विधिपूर्वक पूजन एवं स्नान करने से आयु, आरोग्य, सुख-समृद्धि तथा पितृकृपा की प्राप्ति होती है।
-आचार्य पवन पाठक, सम्पादक, श्री बुद्धि बल्लभ पंचांग