फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जिसका कोई नहीं उसका तो खुदा है यारों

Thu, 16 Apr 2015 02:12 AM IST
राजेंद्र सिंह बिष्ट बबली/अमर उजाला, हल्द्वानी
विज्ञापन
विज्ञापन
आज के दौर में जहां लोग अपनों को भूलते जा रहे हैं, मतलब पूरा होने पर बुजुर्गों को घर से निकाल कर लावारिस छोड़ देते हैं। इन सबके बीच समाज में कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्हें लावारिसों की चिंता है। वह लावारिस लाशों का विधिवत ढंग से अंतिम संस्कार करा रहे हैं। रामपुर रोड निवासी प्रदीप कुमार जायसवाल जो अब तक लगभग 50 लावारिस लाशों के अंतिम संस्कार में सहयोग कर चुके  हैं।
विज्ञापन


प्रदीप का कहना हैं कि अंतिम संस्कार किसी भी धर्म में महत्वपूर्ण संस्कारों में से एक हैं। अगर किसी भी लावारिस लाश का यथोचित तरीके से दाह संस्कार कर दिया जाए तो इससे बड़ा पुण्य कोई नहीं हो सकता।

वे बताते हैं कि 2000 में जब वह इलाहाबाद गए थे तो वहां रेलवे स्टेशन पर एक लावारिस लाश जीआरपी के पास पड़ी थी, उसकी बेकद्री देखकर उन्होंने 400 रुपए देकर उसके अंतिम संस्कार में मदद की। तब से उन्होंने लावारिस लाशों के अंतिम संस्कार का कार्य शुरू किया। शुरुआत में वे हर लावारिस लाश के लिए 1000 रुपए देते थे, लेकिन अब वह पूरे अंतिम संस्कार का खर्चा उठाते हैं।
विज्ञापन


प्रदीप जायसवाल कहते हैं कि वे मंगल पड़ाव चौकी द्वारा लावारिस लाश की सूचना देने पर उसका पूरे विधि विधान से अंतिम संस्कार करवाते हैं, इस काम में उनका टेंपो चालक भी सहयोग करते हैं।

मंगल पड़ाव चौकी इंचार्ज ललित जोशी का कहना हैं लावारिस लाश मिलने पर हम प्रदीप जायसवाल को सूचना देते हैं। वे अपनी टीम के साथ लावारिस लाश का अंतिम संस्कार कर देते हैं। अंतिम संस्कार के समय सिपाही जरूर मौजूद रहते हैं।

एक लावारिस लाश जलाने का खर्च पांच हजार
प्रदीप जायसवाल कहते हैं कि एक लावारिस लाश को जलाने का खर्च लगभग पांच हजार आता है, जिसमें 4 से लेकर 5 क्विंटल तक लकड़ी और 1500 रुपए में बांस, कफन और सामग्री आती हैं, इसके अलावा अन्य खर्च भी होता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें