अब पूरे देश के वन कर्मी अमेरिका में खास तौर पर आजमाए गए ‘इको सिस्टम मैनेजमेंट’ के जरिए जंगलों की देखभाल करेंगे। उत्तराखंड का वन महकमा अमेरिका के इस मैनेजमेंट सिस्टम को देश में पहली बार लागू कर रहा है। इसके लिए फारेस्ट ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में एक पाठ्यक्रम तैयार कर लिया है।
यूएस एड फारेस्ट प्लस प्रोग्राम के तहत हाल में देश भर से 12 फारेस्ट की पढ़ाई कराने वाले संस्था प्रमुख, वैज्ञानिक आदि अमेरिका में फारेस्ट के मैनेजमेंट अध्ययन के लिए भेजे गए थे। इन लोगों ने अमेरिका के वानकोना रेंजर स्कूल और सरक्रूज विश्वविद्यालय के वानिकी विभाग में चलने वाले स्नातक स्तर के कोर्स का अध्ययन कराया गया है।
कोर्स में शामिल रहे एफटीआई निदेशक डा. कपिल जोशी कहते हैं कि अमेरिका में इको सिस्टम मैनेजमेंट एप्रोच पर बेहद जोर है, अब सब चीजों को समग्र रूप में देखा जा रहा है। इसी के तहत वानिकी की पढ़ाई कराई जा रही है। फील्ड विजिट के तौर पर एडिरान्डा के जंगल ले जाया गया है।
यह जगह न्यूयार्क से करीब 400 किमी दूर है। आने वाले समय में न्यूयार्क में पानी की कमी न हो इसके मद्देनजर एडिरान्डा के 60 लाख एकड़ (इसके अंदर 13 शहर भी हैं) में फैले जंगल को संरक्षित और सुरक्षित किया गया है। इसका आधा जंगल प्राइवेट लोगों के पास है।
इस जंगल के प्राइवेट पार्टनरशिप के जरिए कुशल प्रबंधन किया गया है। पानी, जंगल हर चीज का संरक्षण, प्रबंधन है, इसमें हर व्यक्ति का योगदान तय किया गया है। पानी और हवा पर नजर रखी जाती है, हर घंटे पर रिपोर्ट जारी होती है।
इससे हवा में सबसे खतरनाक मरकरी की मात्रा कम हुई है। इसी एप्रोच को देश भर से ट्रेनिंग को आने वाले रेंजर और प्रदेश के फारेस्टर, फारेस्ट गार्ड को पढ़ाया जाएगा।
यह मॉड्यूल तैयार किया गया
एफटीआई ने शुरुआत में पांच दिनों का कैंपा प्रोग्राम के तहत मॉड्यूल तय किया है। इसमें ई नेट लर्निंग, कार्बन मार्केट, कार्बन उत्सर्जन कम करना (रोड अगर बनाई जा रही है, उसमें कैसे बचाया जाए) और बचाना, प्रदूषण (जो वानिकी में नहीं पढ़ाई जाती है), रेड प्लस प्रोग्राम आदि को पढ़ाया जाएगा।
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अभी तक वन कर्मी वन विभाग के कार्ययोजना के आधार पर ही पढ़ाई करते हैं। इसमें बहुत सारी जानकारी समग्र रूप से नहीं है।