नैनीताल। टीचर एजुकेटर फोरम कोर ग्रुप की बैठक में डायट में खुली विज्ञप्ति और चयन के माध्यम से पदस्थापित शिक्षकों को प्रतिनियुक्ति मानने को हास्यास्पद करार दिया है। कहा कि प्रतिनियुक्ति होने पर भत्ते, समय आदि शर्तें होती हैं जबकि डायट में एनसीटीई के मानकों के अनुसार माध्यमिक शिक्षक से उच्च योग्यताधारी शिक्षकों को खुली विज्ञप्ति एवं चयन के माध्यम से आमंत्रित किया गया है।
बृहस्पतिवार को सूखाताल में हुई बैठक में फोरम के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. प्रेम सिंह मावड़ी ने कहा कि शिक्षक शिक्षा के नियोजन, समन्वित विकास, शिक्षा मानकों के विनियम एवं संचालन के लिए 17 अगस्त 1995 को राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद का गठन किया गया था। राज्य गठन के बाद राज्य के प्राथमिक स्तर तक सेवा पूर्व व सेवारत शिक्षकों के प्रशिक्षण को अधिक गुणवत्ता पूर्ण बनाने के लिए जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों को राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद ने निर्धारित मानकों के क्रम में शिक्षकों को इन संस्थानों में पदस्थापित किया। राज्य गठन के बाद वर्ष 2003 से लगभग 15 वर्षों तक डायट में केवल चयनित शिक्षकों को ही पदस्थापित किया जाता रहा और इन्हीं संस्थानों में स्थानांतरण भी किया गया। हाईकोर्ट में याचिका लंबित है। बैठक में डॉ. सीएम जोशी, डॉ. शैलेंद्र धपोला, डॉ. दयासागर आदि रहे।