नैनीताल। हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के स्टिंग मामले में सुनवाई से किया इंकार करते हुए प्रकरण को सुनवाई के लिए अन्य बेंच में भेज दिया है। अब हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश इस प्रकरण की सुनवाई के लिए बेंच गठित करेंगे। उसके बाद ही मामला सुनवाई पर आ पाएगा।
शुक्रवार को पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के विधायकों की कथित खरीद फरोख्त से संबंधित स्टिंग मामले में सुनवाई हुई। पूर्व में सीबीआई ने कोर्ट में अपनी रिपोर्ट पेश की थी, जिसमें सीबीआई ने कहा था कि वह हरीश रावत के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने जा रही है। शुक्रवार को एकलपीठ में सुनवाई के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के अधिवक्ता डीडी कामथ, वीबीएस नेगी और अवतार सिंह रावत ने बहस करते हुए इस मामले में दाखिल सीबीआई की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट को गलत बताया और इस रिपोर्ट को रिकॉर्ड में लेने की भारत सरकार व सीबीआई की दलील का विरोध किया।
न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की एकलपीठ के समक्ष दोपहर से पहले हुई सुनवाई में सीबीआई के अधिवक्ता राकेश थपलियाल और संदीप टंडन ने कहा कि रावत जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं जबकि रावत के अधिवक्ता ने इसका विरोध करते हुए कहा कि उन्होंने पूरा सहयोग किया है। इस दौरान प्रदेश में पूर्व में धारा 356 के प्रयोग की बात भी उठी। कोर्ट ने इस प्रकरण की अगली सुनवाई के लिए एक अक्तूबर की तिथि नियत कर दी थी। अगली तिथि में सीबीआई की प्रारंभिक रिपोर्ट को स्वीकार किए जाने पर विचार होना है।
मामले में मोड़ तब आया जब दोपहर बाद सीबीआई की ओर से पूर्व सीएम हरीश रावत के स्टिंग की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट आज ही कोर्ट में पेश करने का अनुरोध किया गया। हरीश रावत के अधिवक्ताओं ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि जब पहली अक्तूबर की तिथि कोर्ट ने दे दी है तो आज ही इसे क्यों प्रस्तुत किया जा रहा है। इस दौरान कोर्ट में दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं में तीखी नोकझोंक हुई। इस बीच न्यायाधीश ने मामले को सुनने से इंकार करते हुए इसे दूसरी बेंच को भेज दिया।