उत्तराखंड के जंगलों में विगत दिनों लगी भीषण आग और उससे वन्यजीवों के साथ-साथ जनहानि के संबंध में केंद्र सरकार ने सोमवार को हाईकोर्ट में अपना जवाब दाखिल कर दिया। केंद्र की ओर से कहा गया कि उत्तराखंड सरकार को फॉरेस्ट मैनेजमेंट के वर्ष 2015-16 के लिए 356.86 लाख रुपये अवमुक्त किए गए हैं और दावा किया गया कि उत्तराखंड में आग बुझाने के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं।
इस मामले में इन द मेटर ऑफ दॉ प्रोटेक्शन ऑफ फॉरेस्ट इंनवायरमेंट इकोलॉजी, वाइल्ड लाइफ की ओर से हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर हुई थी, जिसमें कहा था कि उत्तराखंड के विभिन्न स्थानों व जंगलों में आग लगने से वन्यजीवों के साथ-साथ मानव हानि भी हो रही है। याचिका में इसकी रोकथाम करने की प्रार्थना की गई थी। कोर्ट ने इस संबंध में पूर्व में सुनवाई के बाद कई बिंदुओं पर केंद्र सरकार को जवाब देने के लिए कहा था।
उसी आदेश के अनुपालन में मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ एवं न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की खंडपीठ के समक्ष सोमवार को डिप्टी कंजरवेटर ऑफ फारेस्ट सरिता कुमारी ने शपथपत्र दायर कर कहा कि उत्तराखंड के जंगलों में 29 अप्रैल तक 922 स्थानों पर आग लगी थी। 1890 हेक्टेअर जंगल जले थे, जिससे 18 लाख रुपये संपत्ति का नुकसान हुआ है। केंद्र सरकार ने अपने जवाब में कहा कि उत्तराखंड सरकार को फॉरेस्ट मैनेजमेंट के वर्ष 2015-16 के लिए 356.86 लाख रुपये अवमुक्त किए हैं। आग बुझाने में 6 हजार से ज्यादा वन श्रमिकों, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ व वायुसेना के हेलीकॉप्टर के साथ-साथ सेना के जवान भी सहयोग कर रहे हैं।