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दावाग्नि: कुमाऊं में सबसे ज्यादा धधके पिथौरागढ़ के जंगल 

Sun, 01 May 2016 11:35 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी।
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जलते जंगल - फोटो : अमर उजाला
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 कुमाऊं में दवाग्नि का सबसे ज्यादा असर पिथौरागढ़ जिले में हुआ है। इसी जिले का सबसे ज्यादा जंगल धधका है। नैनीताल (पहाड़ का इलाका) दूसरे नंबर पर है। यहां पर आग बुझाने को एसडीआरएफ को भी तैनात किया गया है। कुमाऊं में 377 घटनाओं में 797. 56 हेक्टेयर जंगल को नुकसान पहुंच चुका है।
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जाड़ों में बारिश न होने और जंगल में नमी न होने से जंगल जल रहे हैं। इसमें एक मई दोपहर तक पिथौरागढ़ में 76 घटनाओं में 235 हेक्टेयर से ज्यादा का जंगल जल चुका है। नैनीताल जिले में पहाड़ का जंगल सबसे ज्यादा संवेदनशील बना हुआ है। नैनीताल में 93 घटनाएं रिपोर्ट हो चुकी है। इसमें 146.7 हेक्टेयर से जंगल खाक हो चुका है। यहां पर एसडीआरएफ को भी आग बुझाने के लिए बुलाया गया है। दूसरी टीमें भी लगी हैं। अल्मोड़ा में 52 घटनाएं हो चुकी है। यहां पर 121.1 हे. जंगल को नुकसान पहुंचा है।

यह इलाका कई जगहों से जुड़ा हुआ है। यहां पर आग बुझाने के लिए एनडीआरएफ को भी तैनात किया गया है। मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं डा. राजेंद्र सिंह बिष्ट कहते हैं कि बागेश्वर में 34 घटनाओं में 111.81 और चंपावत जिले में 29 घटनाओं में करीब 61 हेक्टेयर जंगल को नुकसान पहुंचा है। सबसे कम तराई के जंगल (पश्चिम वृत्त के प्रभाग आते हैं) जले हैं, जिसमें ऊधम सिंह नगर जिला आता है। आग बुझाने के सभी संसाधन आदि का इस्तेमाल हो रहा है।
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अब तक प्रदेश में 2552 हेक्टेयर खाक
हल्द्वानी। प्रदेश में रविवार तक 1218 घटनाएं हो चुकी है। इसमें 2552.04 हेक्टेयर जंगल जल चुका है। इसमें गढ़वाल मंडल में 680 घटनाओं में 1196.53, कुमाऊं में 377 घटनाओं में 797.36 और वन्यजीव क्षेत्र में 161 घटना में 558.15 हेक्टेयर जंगल जला है।
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