प्रदेश में पहली बार ड्रोन (मानवरहित विमान) के जरिये जंगल और खनन क्षेत्र की निगरानी की जाएगी। वन निगम ने फैंटम नामक ड्रोन को वन महकमे के पश्चिम वृत्त को सौंपा है। जल्द ही इसका ट्रायल शुरू होगा।
कुमाऊं में गौला, नंधौर, शारदा, कोसी, दाबका आदि नदियों में खनन होता है, इन नदियों में लंबे समय से अवैध खनन की शिकायत रहती है। कई बार जब टीम इलाके में पहुंचती है, तो मुखबिरों से सूचना मिलने पर तस्कर फरार हो जाते हैं।
यही हाल मानसून में जंगल का हो जाता है। बरसात में रास्ते बंद होने पर गश्त प्रभावित होती और शिकारियों की घुसपैठ बढ़ जाती है। इसे रोकने के लिये वन निगम ने वन विभाग को ड्रोन उपलब्ध कराया है।
पश्चिमी वृत्त वन संरक्षक डा. पराग मधुकर धकाते कहते हैं कि प्रदेश में पहली बार ड्रोन के जरिये इलाके की निगरानी की जाएगी। ड्रोन में दो कैमरे लगे हैं साथ ही इसमें लगी तकनीक के जरिए मोबाइल पर भी अपडेट मिलेगा।
अधिकारी अगर देहरादून में भी हैं, तो वह जंगल या खनन क्षेत्र में क्या हो रहा है, उसको देख सकेंगे। इसके जरिये कम समय में बड़े इलाके की जांच की जा सकेगी। यह ड्रोन की तय 400 फीट की सीमा तक आसानी से उड़ सकता है।
अगर यह प्रयोग सफल रहता है, तो प्रभागवार ड्रोन को उपलब्ध कराने का विचार किया जायेगा। प्रयास किया जा रहा है कि नई तकनीक, संसाधनों के माध्यम से अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाया जा सके। इसके अलावा वन कर्मी की गश्त, चौकसी का भी पता चल सकेगा।