महिला उद्यमियों को प्रोत्साहन देने के लिए प्रदेश सरकार ने विशेष प्रोत्साहन योजना शुरू की है। इस योजना के अंतर्गत महिलाओं को सर्विस सेक्टर क्षेत्र में स्वरोजगार करने के अलावा कोई भी उद्योग लगाने के लिए अधिकतम 10 करोड़ रुपए तक के प्रोजेक्ट पर ऋण दिया जाएगा। इसके लिए जिला उद्योग केंद्र में आवेदन करने की प्रक्रिया शुरू हो गई।
प्रदेश सरकार द्वारा शुरू की गई विशेष प्रोत्साहन योजना में यह शर्त है कि जिस उद्योग या सर्विस सेक्टर में काम करने के लिए प्रोजेक्ट प्रस्तावित किया गया है उसमें 51 प्रतिशत शेयर महिलाओं के होने चाहिए तभी उस प्रोजेक्ट को उद्योग विभाग से स्वीकृति मिल पाएगी।
महिला उद्यमी से आशय ऐसी महिला से है, जिसने स्वयं के स्वामित्व में उद्यम स्थापित करना प्रस्तावित किया हो या स्थापित किया हो। भागेदारी फर्म होने की स्थिति में न्यूनतम 51 प्रतिशत भागीदारी, भारतीय कंपनी अधिनियम के अंतर्गत गठित कंपनी होने की दशा में 51 प्रतिशत अंशधारक, सहकारी समिति, सहकारी संस्था स्वयं सहायता समूह होने की स्थिति में न्यूनतम 51 प्रतिशत सदस्य महिला होनी आवश्यक हैं।
शासन ने आगामी तीन वर्षों में योजना के अंतर्गत 10 हजार महिला उद्यमियों को लाभान्वित करने का लक्ष्य तय किया है। विभाग के अनुसार वित्तीय प्रोत्साहनों की राशि इकाई के खाते में जमा हो जाने के पश्चात यदि यह पाया जाता है कि इकाई/ बैंक द्वारा कोई तथ्य छुपाए गए हैं या तथ्यों को गलत ढंग से प्रस्तुत किया गया है, तो संवितरित उपादान की राशि की वसूली ब्याज सहित की जाएगी।
वित्तीय प्रोत्साहन सहायता केवल उन्हीं उद्यमों को प्राप्त होगी, जो उपादान मिलने की तिथि के बाद कम से कम तीन वर्ष तक कार्यरत रहेंगी अन्यथा शासन को अधिकार होगा कि दी गई सहायता की समस्त धनराशि इकाई से वसूली कर लें।
जिला उद्योग केंद्र के प्रबंधक दीपक मुरारी ने बताया कि इस योजना के तहत अभी तक नौ उद्यमियों का उपादान पंजीकरण किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि विशेष प्रोत्साहन योजना में अनुदान के अलावा कुल ऋण की राशि की ब्याज दर में से छह फीसदी की छूट या फिर पांच लाख रुपए प्रति वर्ष की छूट दिए जाने का प्रावधान भी है।