लैंसडाउन वन प्रभाग की घटना और डीएफओ के निलंबन के बाद महकमे में खलबली मची हुई है। सतर्कता बरतने के साथ अब विभाग मुरव्वत न करने की बात कह रहा है। ऐसे में बिना अनुमति जंगल में घुसने और पिकनिक करना भारी पड़ सकता है।
आरक्षित वन क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले वन विभाग से अनुमति लेनी चाहिए। इस नियम का शायद ही पालन होता हो। कई लोगों को ऐसा भी कोई नियम होता है, उसकी जानकारी भी नहीं होती है। इसके अलावा जंगल में पिकनिक मनाने के लिए बड़ी संख्या में लोग बिना अनुमति के प्रवेश करते हैं।
वन कर्मी भी लोगों की खुशी या मनोरंजन में बाधक कम ही बनते हैं। अब लैंसडाउन की घटना के बाद से महकमे में खलबली मची हुई है। अब विभाग जंगल में प्रवेश आदि को लेकर सख्ती करने के मूूड में है। कार्बेट पार्क उप निदेशक अमित वर्मा कहते हैं कि नियमों का और कड़ाई से पालन कराया जाएगा।
पुुराने मामले आए चर्चा में
लैंस डाउन की घटना के बाद से पुराने मामलों को लेकर भी विभाग में खूब चर्चा होती रही। करीब 21 साल पहले कार्बेट पार्क के कोर जोन में एक हेलीकाप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने और उसमें भी ऐसे ही पिकनिक करने वालों की चर्चा थी।
इसके अलावा करीब छह साल पहले एक जनप्रतिनिधि के तराई पूूर्वी वन प्रभाग के गेस्ट हाउस में शिकार और दावत करने की भी चर्चा होती रही। इसके अलावा केवल वन विभाग के अधिकारी पर कार्रवाई को लेकर भी रोष था।
कर्मियों का कहना था कि हथियार, शराब आदि को लेकर लोग राज्य में दाखिल हुए थे, तो पुलिस की भी जिम्मेदारी बनती थी। केवल एक विभाग पर कार्रवाई करना ठीक नहीं है।