जल संस्थान की रोक के बावजूद शहर के कुछ क्षेत्रों में पेयजल कनेक्शन हो रहे हैं। जल संस्थान के अधिकृत प्लंबर भले ही कनेक्शन के अवैध कारोबार में न जुड़े हाें मगर निजी प्लंबर तीन से पांच हजार रुपये लेकर कनेक्शन कर रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में मकान तेजी से बन रहे हैं। मकान बनाने के लिए सबसे पहली जरूरत पानी की होती है। जल संस्थान ने एक अप्रैल से नए कनेक्शन पर रोक लगा दी थी। नियम के अनुसार 31 मार्च तक अगर किसी उपभोक्ता ने नए कनेक्शन का आवेदन कर निर्धारित शुल्क जमा किया है तो वो एक माह के भीतर कनेक्शन ले सकता है। एक अप्रैल से नए कनेक्शन के न तो आवेदन स्वीकार किए जा रहे हैं और न ही शुल्क जमा हो रहा है। जल संस्थान के 22 पंजीकृत प्लंबर निर्धारित शुल्क जमा होने के बाद कनेक्शन करने का पांच सौ रुपये से लेकर एक हजार रुपये तक क्षेत्र के अनुसार लेते हैं।
कनेक्शन बंद होने के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में मकान के निर्माण धड़ल्ले से हो रहा है। ऐसे में निजी प्लंबर तीन से पांच हजार रुपये लेकर कनेक्शन जोड़ दे रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र में चल रहे इस खेल की विभाग को हवा तक नहीं लग रही है। विभाग में एक प्रावधान है कि अगर कोई अवैध कनेक्शन करा लेता है और नए कनेक्शन खुलने पर आवेदन करता है तो निर्धारित शुल्क के अलावा एक हजार रुपये जुर्माना लेकर कनेक्शन वैध कर दिया जाता है। इस संबंध में जल संस्थान के अधिशासी अभियंता संतोष कुमार उपाध्याय ने कहा कि पेयजल संकट को देखते हुए इस बार कनेक्शन पर पूर्णत: रोक है अगर कोई अवैध कनेक्शन पकड़ा जाता है तो उसे काट दिया जाएगा।