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पहले कोरोना से जंग जीती, अब उसके साइड इफेक्ट से लड़ाई

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हल्द्वानी। कोरोना से जंग जीत चुके कुछ रोगियों की मुश्किलें पूरी तरह खत्म नहीं हुईं हैं। कुछ मरीजों को पोस्ट कोविड फाइब्रोसिस (सांस लेने में शिकायत, बेहद कमजोरी महसूस करना आदि) की चपेट में आने के बाद अस्पताल पहुंचना पड़ रहा है। डॉक्टरों के अनुसार इस बार निमोनिया को लेकर भी बदलाव देखने को मिल रहा है। तुलनात्मक तौर पर कम उम्र के लोग निमोनिया के से ग्रस्त हो रहे हैं।
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वरिष्ठ टीबी एंड चेस्ट रोग विशेषज्ञ डॉ. गौरव सिंघल कहते हैं कि उनके अस्पताल में अभी तक करीब 15 पोस्ट कोविड फाइब्रोसिस के मरीज इलाज के लिए आ चुके हैं। ये वे मरीज हैं, जिन्हें कोरोना हो चुका है। कोरोना के इलाज के लिए इसमें से काफी मरीजों को आईसीयू तक में भर्ती करना पड़ा था। बाद में जब ये ठीक हो गए तो उनमें अन्य दिक्कतें होने लगीं। ये मरीज कमजोरी महसूस कर रहे हैं। इन्हें बिस्तर से उठने तक ही हिम्मत न होती। थोड़े चलने पर सांस फूलना, खांसी होना और थकान की शिकायत होती है।
क्या कहते हैं डॉक्टर
डॉ. सिंघल कहते हैं कि कोविड संक्रमण के कारण मरीजों के फेफड़े की लेयर मोटी होने के साथ सिकुड़ने लगती है। इसके कारण दिक्कत होती है। उन्होंने बताया कि इन मरीजों का इलाज लंबा चलता है और मरीज ठीक हो जाते हैं।
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मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अशोक कहते हैं कि वर्तमान में दो मरीज अस्पताल में भर्ती हैं, जिनकी कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आ चुकी है पर उन्हें दिक्कत हैं। उन्हें संदिग्ध पोस्ट कोविड फाइब्रोसिस का मरीज मानते हुए इलाज किया जा रहा है।
हफ्ते में दो दिन लगती है पोस्ट कोविड ओपीडी
हल्द्वानी। सुशीला तिवारी अस्पताल में सप्ताह में दो दिन सोमवार और बृहस्पतिवार को पोस्ट कोविड ओपीडी शुरू की गई है। मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. एसआर सक्सेना कहते हैं कि सप्ताह में दो दिन पोस्ट कोविड ओपीडी है, लेकिन जानकारी न होने के कारण प्रतिदिन चार से पांच कोरोना से ठीक हो चुके मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। इसमें कई मरीजों ने थकान के अलावा घबराहट, बेचैनी, उदासी होने की बात कही है।
कम उम्र के लोगों में निमोनिया की शिकायत ज्यादा
हल्द्वानी। डॉक्टरों के अनुसार सर्दियों के शुरू होने के साथ अस्थमा, सीओपीडी ( सांस संबंधी दिक्कत) वाले मरीज बढ़ते हैं। यह हर साल देखने को मिलता था। डॉ. सिंघल कहते हैं कि इस बार देखने को मिल रहा है कि इनके साथ निमोनिया के केस ज्यादा आ रहे हैं। अगर पिछले सालों की तुलना करें तो पहले पचास से सतर साल उम्र से ज्यादा लोगों में निमोनिया की शिकायत होती थी। इस बार 30 से 40 साल के लोग ज्यादा चपेट में आ रहे हैं। निमोनिया में बुखार, खांसी, सांस लेने में दिक्कत होती है। कई बार लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं, इससे मुश्किल बढ़ सकती है।
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ये सावधानियां बरतें
किसी तरह की शारीरिक दिक्कत को नजरअंदाज न करें।
घर में पल्स ऑक्सीमीटर से ऑक्सीजन सेचुरेशन देखते रहे। आक्सीजन लेवल कम होता है तो तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें।
बीमारी को लेकर निराश न हों।
जिन मरीजों को कोई गंभीर बीमारी पहले से है, वे इंफ्लुएंजा रोकने वाली वैक्सीन लगवा सकते हैं।
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