फिल्म एवं आर्ट्स गिल्ड ऑफ उत्तराखंड के तत्वावधान में हल्द्वानी में पहली बार आयोजित दो दिनी फिल्म फेस्टिवल का रविवार को यादगार लम्हों के साथ समापन हो गया। दूसरे दिन राजकीय मेडिकल कालेज के लेक्चर थियेटर में ‘बराका’, ‘द कप’, ‘खै’ समेत पांच फिल्मों का प्रदर्शन किया गया। तिब्बत के लोगों की जिंदगी को प्रदर्शित करने वाली फिल्मों को दर्शकों ने तहेदिल से सराहा।
हल्द्वानी के लोगों को सोसाइटी की सच्चाई से रूबरू कराने के मकसद से फिल्म एवं आर्ट्स गिल्ड ऑफ उत्तराखंड की ओर से फिल्म फेस्टिवल की शुरुआत की गई है। राजकीय मेडिकल कालेज के लेक्चर थियेटर में सायं पांच बजे तक एक-एक कर प्रदर्शित की चारों फिल्मों को देखने के लिए लोग अंत तक जमे रहे। फिल्म देखने के लिए दूरदराज क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे।
इस दौरान अंतरराष्ट्रीय तिब्बती कवि तेनजिन त्सुन्दू, वरिष्ठ पत्रकार हरीश नांबियार, दलीप मंडल, मशहूर कार्टूनिस्ट इरफान, वरिष्ठ साहित्यकार अशोक पांडे, फिल्म निर्माता पुष्पा रावत, रूड़ी सिंह, विशाल विनायक, विजय भट्ट, पीएसए के अध्यक्ष प्रवींद्र कुमार रौतेला, समित टिक्कू, डा. आशुतोष सयाना, सुधीर कुमार आदि मौजूद थे। रात आठ बजे वुडपेकर में क्रिकेट पर आधारित ‘फायर इन बेबीलोन’ फिल्म का प्रदर्शन किया गया।
-मेडिकल कालेज में पहली फिल्म ‘द कप’ दिखाई गई। इस फिल्म में बौध मठ में रहने वाले लामाओं के बीच फुटबाल कितना लोकप्रिय है इसका बहुत ही सुंदर ढंग से प्रदर्शन किया गया। वे फुटबाल का वर्ल्ड कप देखने के लिए क्या-क्या बेचने को तैयार हो जाते हैं, इसे फिल्म में बखूबी दिखाया गया है।
-दूसरी प्रदर्शित ‘बराका’ को देश-विदेश के दर्जनों अवार्ड मिल चुके हैं। फिल्म में हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, फारसी आदि धर्मों के विश्वास को दिखाया गया है कि लोग भौतिकवाद एवं आधुनिकता के इस दौर में यह धर्म कैसे हो गए हैं, को सुंदर ढंग से प्रदर्शित किया गया। इस फिल्म में आवाज का इस्तेमाल नहीं किया गया, केवल संगीत पर बनी है। बिना आवाज की 1992 में बनी इस फिल्म का निर्माण पांच महाद्वीपों पर किया गया।
-फिल्म ‘खै’ एक तिब्बती युवक की कहानी पर आधारित है। वह अमेरिका जाना चाहता है। कश्मीर आंदोलन से जुड़ा एक मुस्लिम दोस्त होने के कारण उसे अमेरिका जाने का मौका नहीं दिया जाता। फिल्म में इस युवक की मनोदशा का बखूबी दर्शाया गया है।
-फिल्म ‘तिब्बेटियन गुरिल्लास इन एक्जाइल’ में भारतीय सेना में तैनात तिब्बती सैनिकों के बलिदान को दर्शाया गया है। भारतीय सेना में शामिल तिब्बती सैनिकों ने चीन हो या फिर बंगलादेश के साथ दोनों युद्धों में उनकी भूमिका और त्रासदी को दिखाया गया है।
अधिक से अधिक लोगों ने शिरकत कर कार्यक्रम को सफल बनाया
फिल्म फेस्टिवल के संयोजक एवं साहित्यकार अशोक पांडे ने बताया कि उम्मीद से ज्यादा लोगों ने हिस्सेदारी कर कार्यक्रम को सफल बनाया है। इससे उन्हें भविष्य में भी इस तरह के कार्यक्रम करने की ऊर्जा मिली है। उन्होंने कहा कि नगर के सांस्कृतिक परिदृश्य में एक नया आयाम जोड़ने की दृष्टि से यह महोत्सव सफल रहा है। उनकी योजना है कि समय-समय पर इस तरह के फेस्टिवल आयोजित कर विभिन्न आयामों को दर्शाने वाली फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा।
नैनीताल में तिब्बतियों के बौद्ध मठ पर कार्यक्रम आज
नैनीताल में सोमवार सुबह नौ बजे तिब्बतियों के बौद्ध मठ पर भी कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। फिल्म फेस्टिवल आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय तिब्बती कवि तेनजिन त्सुन्दू द्वारा कविताओं का पाठ किया जाएगा। उनके साथ साहित्यकार अशोक पांडे भी कविता पाठ करेंगे। उन्होंने बताया कि नैनीताल में ही शाम तीन बजे द कप फिल्म का प्रदर्शन पैविलयन होटल में किया जाएगा।