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काठगोदाम चर्च के फादर को कुचल गया डंपर

Thu, 01 Mar 2018 02:24 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो लालकुआं।
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मृत फादर की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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काठगोदाम सुचेतना संस्था के निदेशक फादर रिचर्ड रोबो को बुधवार की शाम डंपर ने कुचल दिया। वह बाइक से किच्छा अपने मित्र से मिलने जा रहे थे। उनकी बाइक गड्ढों में अनियंत्रित हुई तो डंपर की चपेट में आ गए। फादर को को सुशीला तिवारी अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। 

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हादसा बुधवार शाम करीब पौने छह बजे लालकुआं के वीआईपी गेट के पास हुआ। मूल रूप से कर्नाटक के मंगलुरू के रहने वाले 59 वर्षीय फादर रिचर्ड अपने मित्र किच्छा स्थित सेंट पीटर स्कूल के प्रधानाचार्य जूलियन पिंटो से मिलने अपनी बाइक (यूके 04 वाई 9576) से जा रहे थे। ओवर ब्रिज के नीचे हाइवे पर बने विशालकाय गड्ढों में उनकी बाइक रपट गई और फादर बाइक के साथ गिर पडे। इस दौरान पीछे से आ रहे तेज रफ्तार के डंपर ने कुचल दिया।

हादसे के बाद डंपर चालक भाग निकला। डंपर की गति इतनी तेज थी कि रोबो का सिर कुचलने के साथ उनका हेलमेट भी चकनाचूर हो गया। मौके पर पहुंचे राहगीरों ने तुरंत घटना की सूचना कोतवाली पुलिस को दी। पुलिस कर्मियों ने 108 बुलाकर उन्हें एसटीएच भिजवाया। यहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। देर शाम तक रोबो को कुचलने वाले डंपर का कोई पता नहीं चल सका था। घटना से ईसाई समुदाय में शोक की लहर दौड़ पड़ी हैं। उनके मित्र और बरेली में चर्च के फादर जूलियन ने बताया कि वह 33 वर्षों से हल्द्वानी, नैनीताल, बाजपुर, बहेड़ी और काठगोदाम के चर्चों में फादर के पद पर सेवारत रहे।
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महिलाओं और युवाओं को रोजगार परक बनाने में अग्रणी रहे फादर
 सड़क हादसे के शिकार फादर महिलाओं और युवाओं को रोजगार परक शिक्षा दिलाने में काफी अग्रणी रहे। मौत की सूचना मिलने पर चर्च के लोग काफी गमगीन हो गए। काठगोदाम स्थित चर्च में सन्नाटा पसर गया। पोस्टमार्टम के बाद उनका शव बरेली जाएगा।

काठगोदाम के भूतपूर्व विशप एंथनी फर्नांडीज ने बताया कि फादर ने बरेली, बाजपुर, बहेड़ी चर्च में बतौर फादर काम किया था। दो दशकों से हल्द्वानी में रहते हुए उन्होंने महिलाओं को सिलाई कढ़ाई सिखाकर रोजगार के रास्ते पर खड़ा किया। इसके अलावा निर्धन युवकों को रोजगार योग्य बनाने के लिए कंप्यूटर का प्रशिक्षण दिलाया। फादर युवाओं को हुनरमंद बनाने का उद्देश्य रखते थे। अपने कार्यकाल में फादर ने पहाड़ के काफी लोगों की मदद की थी। रोगियों का इलाज कराया। मौत की सूचना मिलने पर काफी लोग गमगीन हो गए हैं। फादर की मां और भाई मंगलुरू में रहते हैं। फादर ने शादी नहीं की थी। दीन दुखियों की सेवा में ही उन्होंने अपना जीवन लगा दिया था। 

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