नैनीताल। नैनीताल के आसपास बंदर और लंगूरों से परेशान होकर ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों ने खेती व बागवानी कम कर दी है। इसे देखते हुए उत्तराखंड जैव प्रौद्योगिकी परिषद क्षेत्रीय केंद्र पटवाडांगर की ओर से काश्तकारों को कीवी की खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है। कीवी की खेती करने के सही तरीके बताए जा रहे हैं। इसके लिए कृषकों को समय-समय पर प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
जैव प्रौद्योगिकी संस्थान के प्रभारी डॉ. सुमित पुरोहित ने बताया कि वैज्ञानिक पद्धति से सही जानकारी प्राप्त कर किसान कीवी को आर्थिकी का साधन बना सकते हैं। पहाड़ों में समुद्र तल से एक हजार से दो हजार मीटर तक की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में कीवी पैदा की जा सकती है। कीवी में बहुत से औषधीय गुण पाए जाते हैं। यह फल कई रोगों का निवारण करता है और इसे बंदर या लंगूर भी नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। पहाड़ों में किसान कीवी का उत्पादन कर आर्थिकी को मजबूत कर सकता है। इससे पलायन की समस्या को कम किया जा सकता है। संस्थान की ओर से समय-समय पर कृषकों को प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण के बाद पहाड़ के कई लोगों ने कीवी की खेती की शुरुआत की है।