हल्द्वानी। महिला सराफा व्यवसायी से भी डॉक्टर की तरह बदमाशों ने 50 लाख रुपये की रंगदारी मांगी थी लेकिन कोतवाली पुलिस चार लोगों को गिरफ्तार कर घटना का खुलासा किया था।
पालम सिटी में रहने वाली सराफा व्यवसायी रीता खंडेलवाल से पिछले साल फरवरी में बदमाशों ने 50 लाख की रंगदारी मांगी थी। पैसा नहीं देने पर बदमाशों ने महिला के बच्चों को जान से मारने की धमकी दी थी। पुलिस ने इस मामले ऊउधमसिंहनगर जिले के चार बदमाशों को गिरफ्तार कर घटना का खुलासा किया था। इस घटना के तार जेल से जुड़े हुए थे।
हल्द्वानी। जिले में 15 साल पहले तक रंगदारी का बोलबाला था। 90 के दशक में बदमाशों का गिरोह व्यवसायियों का अपहरण कर लेता था लेकिन तत्कालीन पुुलिस अधिकारियों ने बदमाशों से मुठभेड़ करने की रणनीति अपनायी। मुठभेड़ में बदमाशों के ढेर होने के बाद जरायम से जुड़े लोग दहशत में आ गए। इसके बाद रंगदारी मांगने वाले बदमाश गिरोहों की कमर टूट गई।
पुलिस का मानना है कि जिले में 90 के दशक में गैंगवार के साथ रंगदारी पनपने लगी थी। बदमाश व्यवसायियों से रंगदारी मांगते थे। पैसा नहीं मिलने पर व्यवसायियों का अपहरण कर लेते थे। पुलिस ने इस मामले में रंगदारी मांगने के आरोपी गुलजार खान, राजू और धीरज उप्रेती सहित कई अन्य बदमाशों को मुठभेड़ के दौरान ढेर कर दिया। कई अन्य बदमाश जेल भेजे गए। खौफ के चलते बदमाशों ने जिला ही नहीं, बल्कि प्रदेश भी छोड़ दिया। 2003-2004 के दौरान बदमाशों ने रंगदारी के लिए कुमाऊं ज्वेलर्स के व्यवसायी पुत्र का अपहरण कर लिया था। इसी प्रकार भीमताल के बिल्डर नवीन बुद्धिराजा का अपहरण किया गया। इन मामलों में पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए कई बदमाशों को मुठभेड़ के दौरान ढेर कर दिया। कुछ बदमाश सलाखों के पीछे भेजे गए। पुलिस की सख्ती का परिणाम यह रहा कि रंगदारी की घटनाओं पर अंकुश लग गया था।
साक्ष्य के साथ पैरवी जरूरी : मर्तोलिया
सेवानिवृत्त आईजी जीएस मर्तोलिया का मानना है कि रंगदारी या अन्य जघन्य अपराधों में अपराधियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अधिकारियों को साक्ष्य जुटाने के बाद पैरवी में भी सख्ती दिखाना चाहिए। साक्ष्य ऐसा रहना चाहिए कि अपराधियों की जमानत न हो सके। पुलिस इस पर ध्यान दे तो पकड़े जाने के बाद जेल से छूटना आसान नहीं होगा। साथ ही बदमाशों की कमर भी टूटेगी।