सुरेंद्र कुमार वर्मा
पंतनगर। भांग को अतीत में नशे का ही एक रूप माना जाता रहा है लेकिन अब वैज्ञानिक कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज भांग (कैनाबिस) से करने का उपाय ढूंढ रहे हैं। केंद्रीय औषधि एवं सगंध पौध संस्थान (सीमैप) के वैज्ञानिक भांग की ऐसी प्रजाति विकसित करने में जुटे हैं, जिसमें अधिकतम टीएचसी-ए, सीबीडी व कैनाविनायड होगा। ये तत्व कैंसर और दूसरी गंभीर बीमारियों की दवा बनाने में उपयोगी साबित होंगे। इसके लिए उत्तराखंड सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों से भांग की लगभग 60 प्रजातियां चयनित की गई हैं।
काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (सीएसआईआर) के उपक्रम सीमैप के वैज्ञानिकों ने शोध में पाया कि यहां-वहां बहुतायत में स्वयं उगने वाली भांग कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज में कारगर है। इसके बाद से सीमैप अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक जनवरी 2019 से भांग की नई प्रभावकारी प्रजाति विकसित करने की परियोजना पर काम कर रहे हैं। 98 लाख की यह परियोजना एक निजी संस्था आशीष कांसंट्रेट्स इंटरनेशनल (मुंबई) की ओर से सीमैप अनुसंधान केंद्र को सौंपी गई है।
सीमैप लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रधान पर्यवेक्षक डॉ. बीरेंद्र कुमार की देखरेख में इस परियोजना के तहत पूरे देश से भांग के जर्मप्लाज्म एकत्र करके प्रजनन विधि एवं खेती की तकनीकों के जरिये उच्च गुणवत्ता युक्त प्रजाति विकसित की जाएगी।
इस दिशा में काम तेजी से चल रहा है। सीमैप अनुसंधान केंद्र पंतनगर के वैज्ञानिक डॉ. आरके उपाध्याय ने बताया कि भांग की वांछित प्रजाति विकसित कर उसमें उपलब्ध तत्व जैसे टीएचसी, सीबीडी, केनाविनायड और टीएचसी-ए के प्रयोग से असाध्य बीमारियों जैसे कैंसर, मिर्गी, डिप्रेशन आदि की दवा बनाने में मदद मिलेगी, जो चिकित्सा क्षेत्र में भांग का स्वर्णिम भविष्य होगा।
उन्होंने बताया कि अभी तक उत्तराखंड से 50 से अधिक भांग के जर्मप्लाज्म एकत्र किए गए हैं। इनके रासायनिक तत्वों के आधार पर मानक अनुसार शोध कार्य चल रहा है। उम्मीद है कि आने वाले एक वर्ष में उच्च गुणवत्ता की प्रजाति एवं सस्य तकनीक विकसित हो जाएगी।
गठिया रोग के निदान में भी कारगर होने का दावा
भांग के कुछ घटक, जिनमें सीबीडी भी शामिल है, इसके दर्द निवारक प्रभावों के लिए जिम्मेदार हैं, जो गठिया जैसे रोगों से जुड़े दर्द को दूर करने में मदद कर सकते हैं। मुंहासों पर इसका लाभकारी प्रभाव पड़ता है। इसके तेल का उपयोग चिंता और तनाव के इलाज में किया जाता है। भांग के तेल में पाए जाने वाले प्राकृतिक यौगिक तनाव को कम करने और मन को शांत करने में प्रभावी हैं। अनिद्रा रोग में भी भांग का तेल कारगर बताया जाता है> यह हृदय गति को भी धीमा रखता है।
ये नाम भी हैं भांग के
भांग को मैरिजुआना, यारंडी, घास, डोप और काढ़े के रूप में भी जाना जाता है।
कुछ देशों और अमेरिकी राज्यों मेें वैध है दवा के रूप में भांग का इस्तेमाल
यूएस ड्रग एन्फ ोर्समेंट एडमिनिस्ट्रेशन (डीईए ) ने मैरिजुआना और इसके कैनाबिनोइड्स को अनुसूची पदार्थों के रूप में सूचीबद्ध किया है जो सरकारी नियंत्रण में आते हैं। कुछ बीमारियों के इलाज के लिए भांग का उपयोग कुछ देशों और कई अमेरिकी राज्यों में वैध है।
पंतनगर के सीमैप में बोए गए भांग की विभिन्न प्रजातियों के पौधे।- फोटो : RUDRAPUR