केंद्र सरकार के वन कंट्री वन टैक्स ‘गुड्स एंड सर्विस टैक्स’ में वस्तुओं, सेवाओं पर कर दरों का निर्धारण कर दिया है। इसके साथ ही तय हो गया है कि एक जुलाई से सूबे में जीएसटी लागू कर दिया जाएगा। उत्तराखंड में इन दरों को लेकर व्यापारियों ने मिलीजुली प्रतिक्रिया दी है।
पर्यटन प्रदेश में होटलों, इलेक्ट्रिक उपकरणों में टैक्स बढ़ने से सीधे तौर पर पर्यटकों की जेब पर बोझ बढ़ेगा वहीं जटिल भौगोलिक दशा वाले प्रदेश में आवश्यक वस्तुओं पर टैक्स लगने से दाम भी बढेंगे। टैक्स दरों पर जब अमर उजाला की टीम ने व्यापारियों से बात की। पेश है उनसे बातचीत के कुछ अंश :
वस्तु एवं सेवा कर आवश्यक वस्तुओं को टैक्स स्लैब में रखा गया है। यदि इन वस्तुओं को कर मुक्त या कम स्लैब में रखा जाता है तो जनता व व्यापारियों दोनों के लिए फायदेमंद होता है। रोजमर्रा की वस्तुओं पर भी टैक्स दर घटनी चाहिए थी।
-राजीव अग्रवाल, बर्तन व्यापारी
लग्जरी में टैक्स लगाना उचित है, लेकिन दूध, मसाले, दवा जैसी चीजों पर टैक्स नहीं लगाना चाहिए। अति आवश्यक वस्तुओं को तो पांच प्रतिशत से कम स्लैब बनाना चाहिए ताकि कम दाम में प्राप्त हो सके।
-संजय वर्मा, ज्वैलर्स
डिजिटल इंडिया को बढ़ावा दिया जा रहा है दूसरी तरफ टेलीकॉम में 15 से 18 फीसदी टैक्स करना केंद्र की इस मुहिम को झटका है। ई रिटेलर से भी टैक्स लेने पर आन लाइन वस्तुओं के दाम बढ़ेंगे।
- राकेश मिड्डा, कपड़ा व्यापारी
पर्यटन प्रदेश में होटल, इलेक्ट्रानिक उपकरणों, लग्जरी में टैक्स बढ़ने से बड़े व्यापारी प्रभावित हो सकते हैं। वहीं रोजमर्रा की वस्तुएं भी टैक्स दायरे में आने से पहाड़ के छोटे-छोटे दुकानदारों को आर्थिक विशेषज्ञों का खर्चा वहन करना होगा।
-दलजीत सिंह व्यापारी