बरसात के सीजन में नंधौर नदी चोरगलिया क्षेत्र में कहर बरपाती आ रही है। बाढ़ से क्षेत्र के दर्जनों किसानों की सैकड़ों एकड़ जमीन बाढ़ की भेंट चढ़ चुकी है। सिंचाई विभाग बाढ़ की विभीषिका से बचाने के अब तक कोई ठोस कार्ययोजना तैयार नहीं कर सका है। करोड़ों रुपये नंधौर बाढ़ सुरक्षा के नाम पर खर्चने के बावजूद बाढ़ का खतरा चला नहीं है। क्षेत्रवासी सिंचाई विभाग और प्रशासन की बेरूखी से खाका मायूस हैं। अभी भी बरसात में नंधौर नदी क्या कहर बरपाएगी, यह समय के गर्त में हैं।
चोरगलिया क्षेत्र में मल्ल पचौनिया, आमखेड़ा, कुटलिया, खड़कू मुखानी तथा बिहारी नगर में बाढ़ ने सबसे ज्यादा कहर बरपाया है। बाढ़ सुरक्षा कार्य नहीं होने से प्रतिवर्ष एक से डेढ़ एकड़ जमीन नंधौर नदी की भेंट चढ़ जाती है। सिंचाई विभाग द्वारा मल्ला पचौनिया से बिहारी नगर क्षेत्र में 2012 से 2014 तक 2.16 करोड़ रुपये के बाढ़ सुरक्षा कार्य कराए गए हैं। इसके बावजूद आमखेड़ा, मुखानी खडकू तथा बिहारी नगर में नंधौर का कहर बदस्तूर जारी है।
जिससे लालदीन, भुवन, फिरोजुद्दीन, राजेंद्र सिंह, याकूब, सुरेश बाथ्याल, मो. जुबैर की कुल तीन एकड़ भूमि इस वर्ष नंधौर की बाढ़ की चपेट में आ चुकी है। शासन-प्रशासन नंधौर की विभीषिका रोकने में कतई दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है। बाढ़ के बाद नेता और प्रशासनिक अधिकारी बाढ़ पीड़ितों को मुआवजे और आश्वासनों की घुट्टी पिलाकर अपने उत्तरदायित्वों की इतिश्री कर लेते हैं।
जब मुआवजे की बात आती है तो ग्रामीणों को वन भूमि का हवाला देकर चुप करा दिया जाता है। 2002 से अब तक नंधौर नदी मेें आयी बाढ़ से मल्ला चोरगलिया, आमखेड़ा, बिहारी नगर, खडकू मुखानी में 200 एकड़ भूमि बाढ़ की भेंट चढ़ चुकी है। सिंचाई गूलें, हैंडपंप, 10 पक्के मकान भी नंधौर नदी में समा चुके हैं। 2002 से अभी तक सिंचाई विभाग बाढ़ सुरक्षा कार्य में अलग-अलग परियोजनाओं के माध्यम से 50 करोड़ रुपये नंधौर बाढ़ सुरक्षा योजना में खर्च कर चुका है। लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है।