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खतरे में पड़ी जंगल की हरियाली

Wed, 21 Dec 2016 01:58 AM IST
विजेंद्र श्रीवास्तव
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एक तरफ हरियाली बढ़ाने और वनों की सुरक्षा की बात हो रही है। दूसरी तरफ हरियाली के रक्षकों (प्लांटेशन वॉचर/चौकीदार) को नौ महीने से वेतन नहीं मिला है। इसमें बाद कई वॉचर काम छोड़कर चले गए हैं। ऐसे में जंगल की हरियाली खतरे में पड़ गई है।
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वहीं, सरकार करोड़ों रुपये की योजनाओं के शिलान्यास, लोकार्पण कार्यक्रमों में जुटी हुई है। यह तब है, जब हाईकोर्ट सीधे तौर पर कह रहा है कि जब जंगल बचेंगे तब हम बचेंगे।
 पश्चिमी वृत्त के अधीन रामनगर, तराई पश्चिमी, तराई पूर्वी, तराई केंद्रीय और हल्द्वानी वन प्रभाग आता है।

इसमें करीब चार सौ तक प्लांटेशन वाचर तैनात हैं। इन वाचरों को करीब नौ महीने से वेतन नहीं मिला है। वह महीनों से वेतन का इंतजार करने के साथ कार्यालयों का चक्कर काट रहे थे। तराई केंद्रीय वन प्रभाग के भाखड़ा रेंज से पांच प्लांटेशन वॉचर आर्थिक तंगहाली से परेशान होकर काम छोड़कर चले गए हैं।
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कमोबेश यही स्थिति दूसरी रेंजों में भी होने का अनुमान है। ऐसे में वन विभाग को पौधरोपण के लिए लगाए गए सैकड़ों पौधों की रक्षा को लेकर नींद उड़ी हुई है। पौधरोपण के खराब होने की भी आशंका उत्पन्न हो गई है। इन कर्मियों को बीच में जैसे-तैसे आर्थिक मदद की गई।

पर बाद में नोटबंदी के चलते वह भी बंद हो गया है। यह स्थिति तब है, जब सोमवार को हाईकोर्ट ने एक फैसले में साफ कहा कि जंगल की हरियाली को बढ़ाने के लिए पुख्ता व्यवस्था की जाए। हाईकोर्ट की टिप्पणी थी कि जंगल बचेंगे, तो हम बचेंगे।

रखरखाव के लिए बजट होता है। इस बजट के लिए प्रस्ताव गया हुआ है। इसके अलावा वन निगम से भी राशि की व्यवस्था की जा सकती है। जल्द ही धनराशि की व्यवस्था कर संबंधित कर्मियों को वेतन बांट दिया जाएगा। इसमें देरी न हो, इसका खासतौर पर ध्यान रखा जाएगा।  - डा. पराग मधुकर धकाते, वन संरक्षक पश्चिमी वृत्त
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