अमृत योजना हल्द्वानी के लोगों के लिए ‘अमृत’ साबित होगी। योजना में 112 वर्ग किमी पेयजल लाइनों का विस्तार और ओवर हैड टैंकों का निर्माण किया जाएगा। शहर में 145 वर्ग किमी एरिया में सीवरेज लाइन डाली जाएगी। पांच साल में अमृत योजना में 421 करोड़ आठ लाख रुपये से पेयजल, सीवरेज, ड्रेनेज सिस्टम, पार्कों का सौंदर्यीकरण और सार्वजनिक परिवहन सुविधा को सुगम बनाने के साथ पार्किंग स्थल बनाए जाएंगे।
अमृत योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल है। योजना के अंतर्गत तेजी से महानगर का रूप लेने वाले शहरों में बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराना है। उत्तराखंड के सात शहरों में हल्द्वानी भी इसमें शामिल है। योजना पांच साल के लिए लागू होगी। इसमें हर साल भारत सरकार से बजट आवंटित होगा। हल्द्वानी नगर निगम में योजना के पहले चरण में पेयजल, सीवरेज और पार्क सौंदर्यीकरण को शामिल किया गया।
मेयर डा. जोगेंद्र सिंह रौतेला के मुताबिक 2015-2016 में पहले चरण के लिए 26 करोड़ 20 लाख की डीपीआर को स्वीकृति मिलने के साथ साढ़े पांच करोड़ निगम के खाते में ट्रांसफर हो चुका है। इसमें पेयजल के लिए 10 करोड़, सीवरेज के लिए 15 करोड़ 90 लाख, पार्क सौंदर्यीकरण के लिए 30 लाख रुपये है।
योजना में दूसरे साल के लिए मिले 23.78 करोड़
अमृत योजना में दूसरे साल के लिए 23 करोड़ 78 लाख का प्रस्ताव स्वीकृत हो चुका है। सोमवार को नगर निगम में आयोजित बैठक में जल निगम और नगर निगम के अधिकारियों ने प्रस्ताव को लेकर चर्चा की। उप नगर आयुक्त नीरज जोशी ने कहा कि पेयजल योजना पर ही 160 करोड़ और सीवरेज पर 145 करोड़ रुपये लागत आनी है। 421 करोड़ की पांच साल की योजना में 55 करोड़ ड्रेनेज सिस्टम दुरुस्त करने के लिए खर्च होंगे। 54 करोड़ 13 लाख से परिवहन सुविधा को सुदृढ़ करने के साथ पार्किंग बनाएं जाएंगे। 9 करोड़ 95 लाख रुपये पार्कों के सौंदर्यीकरण में खर्च होंगे। बैठक में जल निगम और नगर निगम के अधिकारी मौजूद थे।
हल्द्वानी में पानी की सबसे बड़ी समस्या है। पेयजल लाइनें दशकों पुरानी हैं। आबादी हर साल तेजी से बढ़ रही है। इस लिहाज से पेयजल आपूर्ति और लाइनों का विस्तारीकरण योजना में है। वर्तमान में शहर में 128 वर्ग किमी में पेयजल लाइनें और 54 वर्ग किमी में सीवरेज लाइनें हैं। पांच साल में 112 वर्ग किमी पेयजल और 145 वर्ग किमी सीवरेज लाइनें डाली जाएंगी। 28 एमएलडी का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट भी लगाया जाएगा।
- वीके पंत, अधिशासी अभियंता जल निगम