कार्बेट नेशनल पार्क में इस वर्ष हुई गणना में वर्ष 2007 के मुकाबले 67 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। हाथियों की बढ़ती संख्या से गदगद पार्क निदेशक समीर सिन्हा ने पत्रकारों को बताया कि बढ़ती संख्या के लिए जहां सीटीआर के कर्मचारी बधाई के पात्र हैं, वहीं आने वाले समय में इन हाथियों की सुरक्षा भी पार्क प्रशासन के लिए एक चुनौती है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2007 की गणना में जहां पूरे प्रदेश में 1346 हाथियों में अकेले सीटीआर में 622 हाथी थे, वहीं 2015 की गणना में पूरे प्रदेश में हाथियों का आंकड़ा 1797 तक जा पहुंचा है।
इसमें अकेले सीटीआर में 1035 हाथी देखे गए हैं। कॉर्बेट के वातावरण को हाथियों को बेहद मुफीद बताते हुए उन्होंने कहा कि इन हाथियों में नर व्यस्क हाथी 148 और मादा व्यस्क हाथी 428 हैं। वहीं इसमें एक साल के 87, एक से पांच साल के 138 और एक से 15 साल तक 228 हाथी होना शुभ संकेत है।
हाथियों की यह गणना चार और पांच जून को हुई थी। गणना के तरीके की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि हाथियों की ऊंचाई, दांत और पूछ की बनावट के आधार पर सीधे पारदर्शिता पूर्ण ढंग से इन हाथियों की गणना की गई है।
उन्होंने कहा कि वन्य प्राणियों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए तीन करोड़ 85 लाख के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिली है। उन्होंने बताया कि कार्बेट फाउंडेशन को इस मद में मिले धन को विभाग और जनसहभागिता के माध्यम से खर्च किया जाएगा। इस दौरान पार्क उपनिदेशक साकेत बडोला, पार्क वार्डन शिवराज, डीएस जीना आदि मौजूद रहे।
लंदन की आर्म्स कंपनी जिम कार्बेट की राइफल को जिम कार्बेट की कर्मस्थली में लाना चाहती है। इस राइफल से जिम कार्बेट ने चंपावत में आदमखोर बाघिन को मारा था।
पार्क के डायरेक्टर समीर सिन्हा ने बताया कि 1907 में चंपावत की आदमखोर बाघिन को मारने के लिए तत्कालीन गर्वनर जनरल सर जोन हैबिट ने नैनीताल में लगे जनता दरबार में उन्हें यह राइफल भेंट की थी।
इसी राइफल का प्रयोग करते हुए उन्होंने चंपावत की 430 लोगों को मारने वाली आदमखोर बाघिन का शिकार किया था। यह राइफल 1775 में जॉन रिगवी एंड येगल कंपनी ने बनाई थी। कार्बेट साहब ने भारत से जाने के बाद .275 राइफल को विदेश में ही अपने किसी मित्र को भेंट कर दी थी।
बाद में कंपनी ने इसे उसे व्यक्ति से लिया और अपने मुख्यालय में प्रदर्शन के लिए रखा। इसके अलावा यहां जिम कार्बेट द्वारा लिखी गईं छह किताबों को भी सहेज कर रखा गया है।
उन्होंने बताया कि एक बार आदमखोर बाघिन के शिकार के दौरान यह राइफल गिर गई थी। जिसे बाद में रिपेयर किया गया था।